धनबाद महानगर भाजपा राज सिन्हा  शरणं गच्छामि: जानिए श्रवण राय के चयन की इनसाइड स्टोरी, कौन किस पर पड़ा भारी !

    धनबाद महानगर भाजपा राज सिन्हा  शरणं गच्छामि: जानिए श्रवण राय के चयन की इनसाइड स्टोरी, कौन किस पर पड़ा भारी !

    धनबाद (DHANBAD) : शुक्रवार का दिन धनबाद के लिए उल्लेखनीय रहा. शुक्रवार को ही धनबाद नगर निगम के मेयर की कुर्सी को अनारक्षित करने की अधिसूचना जारी हुई, तो शुक्रवार को ही धनबाद महानगर और ग्रामीण जिला अध्यक्ष के नाम की घोषणा हुई. आगे यह  दोनों मामले जाकर महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि धनबाद महानगर में झरिया, बाघमारा और धनबाद के साथ सिंदरी विधानसभा के क्षेत्र भी आते है. ऐसे में श्रवण राय भी निगम चुनाव में बड़ी भूमिका निभा सकते है. अब जरा जान लीजिए कि श्रवण राय आखिर फिर दोबारा कैसे महानगर के अध्यक्ष बने है. दरअसल, धनबाद के सांसद ढुल्लू महतो , बाघमारा के विधायक शत्रुघ्न महतो और झरिया की विधायक रागिनी सिंह के नहीं चाहते हुए श्रवण राय रिपीट किए गए है .  

    श्रवण राय की "चाभी" राज सिन्हा के पास ही रहेगी, यह भी चर्चा है 

    यह बात अलग है कि श्रवण राय को विधायक राज सिन्हा  का कट्टर समर्थक बताया जाता है. श्रवण राय की "चाभी" राज सिन्हा के पास ही रहेगी ,ऐसा भी कहा जाता है.   शुक्रवार को घोषणा के बाद से ही भाजपा के अंदर एक अलग राजनीति शुरू हो गई है. यह बात भी सच है कि श्रवण राय को आगे संगठन चलाने में कई बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा. क्योंकि झरिया विधायक और बाघमारा विधायक तो उनके खिलाफ हैं ही, सांसद ढुल्लू महतो  भी खिलाफ है.  सूत्र बताते हैं कि लाख प्रयास के बाद भी  धनबाद के सांसद अपने समर्थक नितिन भट्ट और झरिया की विधायक रागिनी सिंह अपने समर्थक मानस प्रसून को अध्यक्ष नहीं बनवा सके. सांसद और दो विधायकों की राय को नजर अंदाज करते हुए भाजपा का प्रदेश नेतृत्व श्रवण राय को फिर से रिपीट कर दिया.  श्रवण राय की ताजपोशी  से विधायक राज सिन्हा  के समर्थक काफी उत्साहित हैं और दबे जुबान से बहुत कुछ बता रहे है. 
     
    पूरे झारखंड में धनबाद महानगर अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर खींचतान चल रही थी

    पूरे झारखंड में धनबाद महानगर अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर खींचतान चल रही थी. सांसद विधायकों के साथ राज सिन्हा  की भी खींचतान चल रही थी.  विधायक राज सिन्हा  श्रवण राय को दोबारा महानगर अध्यक्ष बनना चाहते थे, जिसमें उन्हें सफलता मिल गई.  सूत्र बताते हैं की रायशुमारी में सांसद ढुल्लू महतो ने अपने प्रतिनिधि नितिन भट्ट को जिला अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव रख दिया तो रागिनी सिंह ने मानस प्रसून को जिला अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव दिया था.  इसके बाद से विवाद बढ़ गया. प्रदेश इकाई ने नेताओं को एक उम्मीदवार पर सहमति बनाने को कहा लेकिन बात नहीं बन सकी. कहते हैं कि मामला दिल्ली तक पहुंचा, इसके बाद महानगर अध्यक्ष के नाम पर फैसला हुआ. बता दें कि ग्रामीण भाजपा जिला अध्यक्ष पर भी मुहर  लग गई है. मोहन कुंभकार को ग्रामीण जिला अध्यक्ष बनाया गया है. इधर श्रवण राय के महानगर जिला अध्यक्ष बनने के बाद शुक्रवार को जुलूस भी निकाला गया. इस जुलूस के कई माने -मतलब हो सकते है.  निगम के चुनाव में क्या अब भाजपा की ओर से विधायक राज सिन्हा  की चलेगी, यह सवाल भी बड़ा हो गया है. 

    भाजपा निगम चुनाव दलीय आधार पर कराने की मांग कर रही 

    वैसे, भाजपा निगम चुनाव दलीय आधार पर कराने  की मांग कर रही है, लेकिन इसकी संभावना कम ही दिख रही है.  भाजपा में भी निगम चुनाव लड़ने वालों की लंबी सूची है. ऐसे में भाजपा नेताओं को चुनाव लड़ने और जीतने के लिए विधायक राज सिन्हा  "शरणम गच्छामि" करना होगा. वैसे भाजपा से निगम का चुनाव लड़ने वाले भाजपा के कई ऐसे भी हैं, जिनका अपना जन आधार है और वह इस आधार पर चुनाव की वैतरणी पार करने की कोशिश करेंगे. वैसे इतना तो तय हो गया है कि राज सिन्हा ,जिस भी उम्मीदवार का समर्थन करेंगे, कम से कम महानगर के दो विधायक और सांसद इसका खुलकर विरोध करेंगे. कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि धनबाद में भाजपा की राजनीति आगे चलकर और दिलचस्प होगी. लड़ाई सड़क पर आ जाये तो कोई आश्चर्य नहीं. 

    रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो


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