DHANBAD LOKSABHA: अपने लोकसभा क्षेत्र में जन्मे सांसद को अब तक नहीं चुन पाए हैं धनबाद के वोटर, 2024 में भी नहीं चुन पाएंगे 

    DHANBAD LOKSABHA: अपने लोकसभा क्षेत्र में जन्मे सांसद को अब तक नहीं चुन पाए हैं धनबाद के वोटर, 2024 में भी नहीं चुन पाएंगे

    धनबाद(DHANBAD): 1952 में अस्तित्व में आए धनबाद लोकसभा क्षेत्र के मतदाताओं को अपने संसदीय क्षेत्र में जन्मे किसी प्रतिनिधि को चुनने का अब तक मौका नहीं मिला है .2024 के चुनाव में भी नहीं मिलेगा. क्योंकि एनडीए और इंडिया ब्लॉक के जो भी उम्मीदवार जीतेंगे, वह धनबाद संसदीय क्षेत्र से नहीं आएंगे.  भाजपा प्रत्याशी विधायक ढुल्लू महतो बाघमारा के विधायक हैं और बाघमारा गिरिडीह संसदीय क्षेत्र में आता है. इसी प्रकार इंडिया ब्लॉक की प्रत्याशी अनुपमा सिंह बेरमो की रहने वाली हैं और बेरमो भी गिरिडीह संसदीय क्षेत्र में आता है. कहा जा सकता है कि 2024 के चुनाव में भी दोनों उम्मीदवार धनबाद लोकसभा क्षेत्र से बाहर के ही हैं. दोनों गिरिडीह लोकसभा क्षेत्र के वोटर हैं. धनबाद के अब तक जो भी सांसद रहे हैं, मसलन पीसी बोस, पीआर चक्रवर्ती, रानी  ललिता राजलक्ष्मी, राम नारायण शर्मा, एके राय, शंकर दयाल सिंह, रीता वर्मा, चंद्रशेखर दुबे उर्फ ददई दुबे, पशुपतिनाथ सिंह. इनमें से किसी का धनबाद लोकसभा क्षेत्र में जन्म नहीं हुआ है. 2024 में भी जो भी प्रत्याशी चुनाव जीतेंगे, वह धनबाद लोकसभा क्षेत्र के नहीं होंगे.

    अब तक धनबाद लोकसभा से सर्वाधिक मतों से जीतने का रिकॉर्ड पशुपतिनाथ सिंह के नाम 

    2024 के चुनाव में भाजपा ने तीन बार के सांसद रहे पशुपतिनाथ सिंह का टिकट काटकर बाघमारा के विधायक ढुल्लू महतो को टिकट दिया है. जबकि कांग्रेस ने कद्दावर नेता रहे राजेंद्र सिंह की बहू और विधायक अनूप सिंह की पत्नी अनुपमा सिंह को धनबाद से उम्मीदवारी सौंपी है. धनबाद लोकसभा सीट 1952 से अस्तित्व में है. 1971 में धनबाद लोकसभा से कांग्रेस के उम्मीदवार रामनारायण शर्मा चुनाव जीते थे. उन्हें 1,0 7,308 वोट मिले थे. 2019 में भाजपा के टिकट पर चुनाव जीते पशुपतिनाथ सिंह को 8, 27,234 वोट मिले थे. धनबाद लोकसभा से सर्वाधिक मतों से जीतने का रिकॉर्ड पशुपतिनाथ सिंह के नाम गया है. देखना दिलचस्प होगा कि इस रिकार्ड को 2024 में कोई तोड़ पता है अथवा यह रिकॉर्ड अभी पशुपति नाथ सिंह के नाम पर बना रहेगा.वैसे धनबाद में अब  लू के थपेड़ों के बीच चुनाव की तपिश बढ़ने लगी है.चुनाव पर आशीर्वाद और डिनर पॉलिटिक्स हावी होती दिख रही है.

    रिपोर्ट: धनबाद ब्यूरो 



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