DHANBAD : जिसके नाम का सिंदूर लगाती थी, उसी की करा दी हत्या, अब जाएगी जेल, जानिए पूरा मामला 

    DHANBAD : जिसके नाम का सिंदूर लगाती थी, उसी की करा दी हत्या, अब जाएगी जेल, जानिए पूरा मामला

    धनबाद(DHANBAD): जिसके नाम का मांग में सिंदूर लगाती थी, उसी की हत्या करवा दी. यह चौंकानेवाली बात बरवाअड्डा थाना क्षेत्र में रेलकर्मी रामचंद्र यादव की हत्या के मामले में सामने आई है. पुलिस ने पत्नी को तो गिरफ्तार कर ही लिया है, साथ ही हत्या करने वाले पिंटू कुमार साव  को भी कानून के शिकंजे में कस दिया है. अपनी बहन से शादी करा देने की लालच देकर और खुद पति की जगह अनुकंपा पर रेलवे में नौकरी पाने के लिए पत्नी ने ही साजिश कर  रेलकर्मी  पति की हत्या करा दी.  पुलिस की माने तो पत्नी जीरा देवी ने ही  सब कुछ षड्यंत्र किया. 11 दिसंबर को रामचंद्र यादव, जब ड्यूटी के लिए घर से निकला तो इसकी जानकारी जीरा देवी ने पिंटू को दी. पिंटू ने रामचंद्र यादव को पैसे व शराब की  लालच देकर बरवाअड्डा  बुलाया. रात को बरवाअड्डा  थाना क्षेत्र के जयनगर जोरिया  के समीप ले गया और शराब पिलाकर चाकू से उसकी हत्या कर दी. 
     
    17 दिसंबर को रामचंद्र यादव का शव झाड़ियों में मिला था 

    17 दिसंबर को रामचंद्र यादव का शव झाड़ियों में पाया गया.  पुलिस ने रामचंद्र का मोबाइल लोकेशन निकाला.   उसके बाद पिंटू और उसकी पत्नी जीरा देवी को घर से उठाकर पुलिस थाना ले गई. पूछताछ शुरू की ,पूछताछ जैसे-जैसे आगे बढ़ता गया, मामले का खुलासा होता गया और हत्याकांड से पर्दा उठ गया.  सूत्रों के अनुसार रामचंद्र यादव के शव को कब्जे में लेने के लिए पुलिस जब  जयनगर पहुंची तो पिंटू साव भी  घटनास्थल पर मौजूद था. पुलिस जब लाश को  लेकर थाना पहुंची तो वह भी थाना आ गया. वह पुलिस की हर गतिविधियों पर नजर रखे हुए था और पल-पल की सूचना फोन पर जीरा देवी को दे रहा था. पिंटू कुमार ने रामचंद्र यादव की हत्या करने के बाद उसका मोबाइल अपने पास रख लिया. इतना ही नहीं, उसने रामचंद्र यादव का मोबाइल बिशनपुर में रहकर पढ़ाई करने वाले एक छात्र को  बेच दिया था. छात्र ने पुलिस को बताया कि पड़ोसी पिंटू ने कहा था कि मोबाइल उसका है. इसी वजह से उसने मोबाइल खरीद ली.  पूछताछ के बाद पुलिस ने छात्र को छोड़ दिया. रामचंद्र यादव धनबाद के  न्यू स्टेशन रोड स्थित रेलवे क्वार्टर में रहते थे और गोमो में लीबर मैन  के पद पर काम कर रहे थे.

    रिपोर्ट: शांभवी सिंह, धनबाद 



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