DHANBAD : अगर आप अंग्रेजी में आवेदन लिख कर थाना पहुंचते हैं तो लौटा दिए जा सकते हैं, जानिए धनबाद में ऐसा किस थाना में हुआ

    DHANBAD : अगर आप अंग्रेजी में आवेदन लिख कर थाना पहुंचते हैं तो लौटा दिए जा सकते हैं, जानिए धनबाद में ऐसा किस थाना में हुआ

    धनबाद (DHANBAD) :  अगर अंग्रेजी में आवेदन लेकर आप धनबाद जिले के किसी थाने में गए हैं ,तो यह कोई जरूरी नहीं है कि आपका आवेदन स्वीकार कर लिया जाएगा.  आपको कहा जा सकता है कि आवेदन हिंदी में लिखकर लाएं. आज के जमाने में भी अगर ऐसा होता है तो इसे आप क्या कहेंगे. लेकिन धनबाद के पुटकी थाने में कुछ ऐसा ही हुआ है. बैंक मैनेजर को कहा गया है कि आपका आवेदन अंग्रेजी में है. आप हिंदी में लिखकर लाएं तो आवेदन स्वीकार किया जाएगा. पुटकी की बैंक ऑफ़ इंडिया ब्रांच में नकली सोना गिरवी रखकर 43 लाख का लोन लेने के मामले में इसी वजह से प्राथमिकी दर्ज नहीं हो सकी.

    क्या है मामला

    गुरुवार की शाम ब्रांच मैनेजर मामला दर्ज कराने पुटकी थाना पहुंचे लेकिन आवेदन अंग्रेजी में होने के कारण पुटकी पुलिस ने स्वीकार नहीं किया. ऐसे में ब्रांच मैनेजर को बिना मामला दर्ज कराए लौटना पड़ा. पुलिस ने उन्हें हिंदी में लिखकर आवेदन लाने को कहा. बैंक में जो गड़बड़ी पकड़ी गई है, वह भी अजीब है. आरोप के मुताबिक नकली सोना रखकर 43 लाख रुपए का लोन ले लिया गया है. सोना सत्यापन करने वाले पुटकी के सोना दुकान मालिक को भी इस मामले में संदेह के घेरे में लिया गया है. फिलहाल के शाखा प्रबंधक ने पुटकी के सुबल्ट चंद्र उपाध्याय के अलावा तत्कालीन ब्रांच मैनेजर कौशल कुमार, सहायक मैनेजर विशाल कुमार और सोना का सत्यापन करने वाले पायल ज्वेलर्स के बालेश्वर सोनी को भी इस आवेदन में आरोपी बनाया था. पहले तो बैंक वालों ने लोन लेने वाले को मनाने की कोशिश की कि वह लोन की भरपाई कर दे और अपना सोना ले जाए, लेकिन बैंक प्रबंधन इसमें सफल नहीं हुआ. अब इस मामले में घिरता देख बैंक प्रबंधन ने मुकदमा करने का निर्णय लिया है. सूत्र बताते हैं कि सुबल चंद्र उपाध्याय ने नकली सोना गिरवी रखकर 43 लाख रुपए का गोल्ड लोन लिया था. लोन की किस्त जमा नहीं होने पर बैंक को संदेह हुआ. सोना की जांच कराई गई तो नकली निकला. डेढ़ साल पूर्व लिए गए लोन का एम आई समय पर जमा हो रहा था. इसी बीच ब्रांच मैनेजर का तबादला हो गया. आरोप है कि पिछले 3 महीने से किस्त जमा नहीं हो रहा था तब यह बात की जानकारी में आई. उसके बाद जांच पड़ताल हुई तो इस मामले का भेद खुला.


    रिपोर्ट : सत्यभूषण सिंह, धनबाद


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