धनबाद का इंजीनियर म्यांमार में बना बंधक, मां ने गहने बेचकर चुकाई फिरौती, फिर भी कर रहीं हैं बेटे की रिहाई का इंतजार

    धनबाद का इंजीनियर म्यांमार में बना बंधक, मां ने गहने बेचकर चुकाई फिरौती, फिर भी कर रहीं हैं बेटे की रिहाई का इंतजार

    धनबाद (DHANBAD): भूली न्यू आजाद नगर के रहने वाले मैकेनिकल इंजीनियर मोहम्मद शाहजेब रहमान को म्यांमार में बंधक बना लिया गया है. आरोप है कि वहां मौजूद लोगों ने उसकी मां से 5 हजार डॉलर फिरौती मांगी. मां निशांत अफरोज ने गहने बेचकर और कर्ज लेकर रकम का अधिकांश हिस्सा भेज भी दिया, लेकिन बेटा अब तक घर नहीं लौटा.

    शाहजेब की मां ने भारतीय दूतावास, गृह मंत्री और कई अधिकारियों को पत्र लिखकर बेटे की सुरक्षित रिहाई की अपील की है. उनका कहना है कि उन्हें सरकार पर पूरा भरोसा है और वे अपने बेटे के लौटने का इंतजार कर रही हैं.

    क्या है पूरा मामला 
    साल 2024 में शाहजेब आईटी सेक्टर में नौकरी करने बेंगलुरु गया था, लेकिन कुछ महीनों बाद वापस लौट आया. सितंबर में वह फिर से बेंगलुरु गया, लेकिन इस बार वहां से बाहर निकलकर म्यांमार चला गया. पहले उसने यह बात घर में नहीं बताई. जनवरी-फरवरी में उसने मां को बताया कि वह म्यांमार में मार्केटिंग की नौकरी कर रहा है. वह टेलीग्राम और व्हाट्सएप के जरिए संपर्क में रहता था और समय-समय पर पैसे भी भेजता था.

    8 अक्टूबर को शाहजेब ने मां को कॉल कर बताया कि उसे म्यांमार से निकलने के लिए 2.5 लाख रुपये देने होंगे. इससे पहले मां ने किसी को कुछ नहीं बताया, लेकिन बाद में रिश्तेदारों को जानकारी दी और फिर तुरंत भारतीय दूतावास तथा अन्य अधिकारियों से मदद मांगी.

    एक सप्ताह तक बेटे की कोई खबर नहीं मिली. बाद में उसने टेलीग्राम पर मैसेज कर बताया कि उसका फोन बॉस ने ले लिया था और उसे अवैध काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है. जब उसने मना किया, तो उसे बंधक बना लिया गया और फिरौती की रकम बढ़ाकर 3.6 लाख रुपये कर दी गई.

    मां ने गहने बेचकर, कर्ज लेकर और बेटे की भेजी हुई रकम मिलाकर 4 हजार डॉलर भेजे. बाकी 1 हजार डॉलर भी उन्होंने 7 नवंबर को भेज दिए. ऐसे में कुल मिलाकर करीब 4.65 लाख रुपये भेजे गए. बेटे ने बताया था कि कुछ दिन में उसे छोड़ दिया जाएगा. 

    इसके बाद उसने बताया कि उसे याताई स्थित डिटेंशन सेंटर में छोड़ दिया गया है और उसका पासपोर्ट भी वापस कर दिया गया है. लेकिन खाने-पीने में दिक्कत हो रही है. उसने 20 हजार रुपये और मांगे, जो मां ने किसी तरह भेज दिए. उसके बाद से फिर कोई संपर्क नहीं हुआ. मां निशांत अफरोज का कहना है कि वे लगातार दूतावास और मंत्रालय से संपर्क में हैं. अधिकारी उन्हें भरोसा दिला रहे हैं कि मामले में कार्रवाई जारी है.

    2014 में उसने चिरकुंडा स्थित सिटी मॉडल स्कूल से 10वीं पूरी की और फिर केके पॉलिटेक्निक से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की.

    रिपोर्ट: नीरज कुमार


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