DHANBAD : दुर्गा मां फिर आना कह विदा की गई माता, महिलाओं ने सिंदूर खेला कर की मां दुर्गा की विदाई  

    DHANBAD : दुर्गा मां फिर आना कह विदा की गई माता, महिलाओं ने सिंदूर खेला कर की मां दुर्गा की विदाई    

    धनबाद(DHANBAD) : आज दशहरा है. असत्य पर सत्य की जीत का दिन है. असत्य के प्रतीक रावण का भी दहन किया जाएगा. शाम तक अधिकांश पूजा पंडालों की मूर्तियां विसर्जित कर दी जाएगी. जहां मूर्तियां विसर्जित नहीं होंगी. वहां भी आज से दीया-बत्ती नहीं होगा, सिर्फ मेला रहेगा. कलश को आज सभी पंडालों में विसर्जित कर दिया गया. धनबाद में इस विसर्जन को भी बड़े उत्साह और उमंग के साथ किया जाता है. 

    आंखों को खूब भांति है सिंदूर खेला 

    शहर के पारंपरिक हरि मंदिर पूजा पंडाल में तो सिंदूर खेला होता है. सुहागिन महिलाएं एक दूसरे को सिंदूर लगाकर माता से सुहाग की रक्षा की कामना करती है. इसके लिए महिलाओं में काफी उत्साह होता है. सिंदूर खेला के बाद  जुलूस की शक्ल में कलश को विसर्जन करने महिलाएं भी तालाब तक जाती है. यह दृश्य आखो को बहुत ही भांति है. आज भी नाचती ,गाती  महिलाएं  जब सड़क पर चल रही थी तो वह दृश्य काफी मनमोहक था.  बैंड बाजों की धुन पर महिलाएं नाचती-गाती चल रही थी. इस बार बरसात ने  भक्तों के साथ साथ दुकानदारों को भी परेशान किया. धनबाद के दुकानदार छोटे हो अथवा बड़े, जितनी पूंजी  लगाए थे, उसके हिसाब से उनको रिटर्न नहीं मिला. 

    छोटे दुकानदारों की तो पूंजी ही डूब गई 

    एक अनुमान के अनुसार 25 करोड़  या उससे अधिक का नुकसान छोटे-बड़े करोबारियो को हुआ है.  ठेला ,खोमचा लगाकर पैसा कमाने की उम्मीद पाले छोटे-छोटे दुकानदारों की तो पूंजी भी डूब गई. अब उन्हें चिंता है कि महाजन को पैसा कैसे वापस करेंगे. इस बार धनबाद में पूजा पंडालों के निर्माण में विशेष तैयारी की गई थी. कई महीने पहले से  ही पंडालों के आकार और थीम निर्धारित कर लिए गए थे. आयोजकों  को भी भरोसा था कि इस बार पूजा में भीड़ काफी होगी. भीड़ घरों से निकली भी लेकिन बारिश बीच-बीच में खलल डालती रही. बारिश को छकाते और खुद को बचाते भक्त माता  के दरबार में हाजरी लगाते  रहे. 

    रिपोर्ट: शांभवी सिंह, धनबाद


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