धनबाद(DHANBAD): धनबाद कोयलांचल में भाजपा के ढहते किले को बचाने के लिए भगीरथ प्रयास शुरू कर दिए गए हैं. यह अलग बात है कि अंदरुनी खींचतान की वजह से प्रदेश भाजपा की भी किरकिरी हो रही है. लोकल संगठन की तो बदनामी हो ही रही है. सोमवार को राज्य सरकार के खिलाफ आंदोलन में धनबाद में भाजपा के सांसद और विधायक एक मंच पर दिखे. शायद बहुत दिनों के बाद ऐसा नजारा देखने को मिला था. यह अलग बात है कि इस कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी मौजूद थे और शायद यही वजह रही कि सांसद और विधायक भी कार्यक्रम में मौजूद थे.
बिजली -पानी संकट के खिलाफ के कार्यक्रम से संदेश
यह कार्यक्रम बिजली -पानी संकट के खिलाफ किया गया था. कहा जा सकता है कि पानी -बिजली के संकट के बहाने जनप्रतिनिधियों को एक मंच पर लाने की कोशिश की गई थी. कार्यक्रम में सांसद ढुल्लू महतो , विधायक राज सिन्हा , रागिनी सिंह और शत्रुघ्न महतो मौजूद थे. लोगों की आंखों ने काफी दिनों के बाद यह सब देखा। इसे भाजपा के नेताओं में चल रही आपसी खींचतान को खत्म करने के चश्मे से देखा जा रहा है. सूत्र तो यह भी बता रहे हैं कि भाजपा के नेताओं को ऐसा करने की कड़ी नसीहत दी गई है. सूत्रों के अनुसार कुछ दिन पहले रांची में संगठन और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में प्रदेश स्तर पर बैठक भी हुई थी. प्रदेश के नेताओं ने धनबाद में खेमेबाजी को गंभीर बताया था.
प्रदेश नेतृत्व भी अब हो गया है गंभीर
नेताओं को नसीहत दी गई थी कि आपसी भेदभाव भुलाकर एक साथ रहे. उल्लेखनीय है कि नगर निगम चुनाव और उसके बाद से अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे. जिसका विपरीत असर कार्यकर्ताओं पर पड़ा और अब भी पड़ रहा है. यह अलग बात है कि दावा किया गया है कि कोयलांचल में भाजपा को एकजुट करने की जिम्मेवारी नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी को दी गई है. बाबूलाल मरांडी मंगलवार को एक बैठक भी कर सकते हैं. इस बैठक में भाजपा के नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहेंगें। दरअसल, निगम चुनाव के दौरान और उसके बाद भाजपा के अलग-अलग गुट सक्रिय हो गए है. विवाद तो महानगर जिला अध्यक्ष के चयन को लेकर भी शुरू हुआ था, लेकिन यह विवाद निगम चुनाव में खुलकर सामने आ गया.
अलग -अलग कर्यक्रम करने की चल निकली है परिपाटी
उसके बाद भी एक बड़ा कार्यक्रम हुआ. उस कार्यक्रम में धनबाद सदर विधायक राज सिन्हा को आमंत्रित तक नहीं किया गया था. यह बात खूब प्रचारित हुई. इसके बाद धनबाद- बोकारो रोड को लेकर विधायक राज सिन्हा ने अनशन शुरू किया। उस अनशन में भी भाजपा के बड़े नेताओं की सहभागिता नहीं के बराबर रही. मतलब धनबाद भाजपा में खेमेबाजी बढ़ गई है. अब इस खेमेबाजी को नियंत्रित करना प्रदेश भाजपा के लिए जरूरी हो गया है. धनबाद के 6 विधानसभा क्षेत्र में धनबाद, झरिया और बाघमारा में भाजपा के विधायक हैं. जबकि धनबाद से सांसद ढुल्लू महतो भाजपा के हैं. ऐसे में भाजपा अपने गढ़ को बचाने के लिए एक बार प्रयास शुरू कर दिया है. अब समय बताएगा कि आगे होता है क्या----?

