धनबाद(DHANBAD):धनबाद भाजपा पर "शनि की वक्र दृष्टि" पड़ गई है. किसी भी विवाद को सलटाने के लिए जब-जब कोशिश की जाती है, एक नया विवाद खड़ा हो जाता है. धनबाद भाजपा में रोज नए-नए समीकरण बन और बिगड़ रहे है. एक नए समीकरण के रूप में सांसद ढुल्लू महतो और पूर्व सांसद पशुपतिनाथ सिंह का सामने आया है, तो विधायक राज सिंहा इससे अलग कर दिए गए हैं या अलग हो गए हैं. यह एक नई राजनीति की शुरुआत कहीं जा रही है. सोशल मीडिया भी इसका गवाह बन रहा है. दरअसल, धनबाद भाजपा को एकजुट करने के लिए और पार्टी को "ताकत" देने के लिए रविवार को धनबाद विधानसभा क्षेत्र में भाजपा कार्यकर्ता संवाद का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में सांसद ढुल्लू महतो , पूर्व सांसद पशुपतिनाथ सिंह, महानगर जिला अध्यक्ष श्रवण राय, मेयर प्रत्याशी रहे संजीव अग्रवाल, कई पूर्व जिला अध्यक्ष सहित अन्य मौजूद थे.
धनबाद भाजपा में क्या कोई नया समीकरण तैयार हुआ है
लेकिन जिसके विधानसभा क्षेत्र में कार्यक्रम हो रहा था, उस क्षेत्र के विधायक कार्यक्रम में शामिल नहीं थे. सांसद का रुख पशुपतिनाथ सिंह के प्रति काफी नरम था. पहले ऐसा नहीं देखा जा रहा था. सांसद ने कहा कि मतभेद को दूर कर पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट करना संवाद का उद्देश्य है. विवाद पर विराम लगाकर विकास के रास्ते पर आगे बढ़ना है. पूर्व सांसद पशुपतिनाथ सिंह अभिभावक है. नरम स्वभाव के हैं. सांसद ने खुद को थोड़ा गर्म स्वभाव का बताया। कहा कि जब-जब नरम गरम का मेल होता है, तो ज्यादा ऊर्जा मिलती है. उन्होंने कहा कि पार्टी के खिलाफ काम करने वालों की पहचान होगी और पार्टी हित में काम करने वाले को तरजीह मिलेगी। खैर, आगे क्या होगा, यह तो नहीं कहा जा सकता, लेकिन विधायक राज सिन्हा इस कार्यक्रम में मौजूद नहीं थे. सूत्र तो यह बता रहे हैं कि उन्हें बुलाया ही नहीं गया था, हालांकि इसकी अधिकृत पुष्टि नहीं हो रही है.
राज सिन्हा के विरोधी की पीठ पर किसका था हाथ
सब कोई मुंह में ताला जड़ लिया है. पूछे जाने पर कहते हैं कि यह बहुत संवेदनशील मामला है. इस पर हमें कुछ भी बोलना सही नहीं होगा। वैसे तो महानगर जिला अध्यक्ष के कार्यक्रम में शामिल हो जाने से यह माना जाना चाहिए कि यह कार्यक्रम जिला समिति से हुआ, लेकिन राज सिन्हा क्यों नहीं मौजूद रहे, इसका उत्तर कोई नहीं दे रहा है. श्रवण राय राज बाबू के समर्थक बताये जाते हैं. तो क्या इसमें भी कोई राजनीति है. दरअसल, अंदरखाने के सूत्र बता रहे हैं कि यह कार्यक्रम राज सिन्हा के विरोधी की पीठ पर हाथ रखकर आयोजित कराया गया था. पीठ पर किसका हाथ था, यह भी बड़ा सवाल है , कहा तो यह भी जा रहा है कि आयोजक ने भोजन की भी व्यवस्था की थी. दरअसल, मेयर चुनाव में भाजपा कार्यकर्ताओं में बिखराव स्पष्ट दिख था. उसे विखराव को समेटने के लिए संवाद कार्यक्रम आयोजित था.
विवाद ख़त्म करने की बैठक से उठा एक और बड़ा विवाद
लेकिन विधायक राज सिन्हा को नहीं बुलाने से एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. पोस्टर में भी उनकी तस्वीर नहीं थी. जानकारी के अनुसार पोस्टर में सांसद ढुल्लू महतो ,पूर्व सांसद पशुपतिनाथ सिंह, महानगर जिला अध्यक्ष श्रवण राय का फोटो था. लेकिन जिसके विधानसभा क्षेत्र में कार्यक्रम हुआ, उसकी ही तस्वीर गायब थी. मतलब कार्यकर्ताओं को समेटने की जो कोशिश शुरू हुई, उससे एक नया विवाद खड़ा हो गया है. दरअसल, धनबाद भाजपा में गुटबाजी चरम पर है. हर कोई एक दूसरे से अपने को मजबूत साबित करने में लगा है और इसी वजह से पार्टी में विवाद हो रहा है. इस संवाद कार्यक्रम का कितना फलाफल निकलेगा, यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन इतना तो तय है कि एक नए और मजबूत विवाद का जन्म हो गया है. एक तरह से मान लेना चाहिए कि अब धनबाद जिले के तीन भाजपा विधायकों में दो विधायक एक तरफ हैं और एक विधायक दूसरी ओर. ऐसी बात नहीं है कि प्रदेश संगठन को इन सब की जानकारी नहीं है, बावजूद प्रदेश की छुट्टी भी कई सवालों को जन्म दे रहा है.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
Thenewspost - Jharkhand
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