देसी मुर्गा या बंगाल का बहुरुपिया? देखिए कैसे देसी मुर्गा के नाम पर लोगों को बेबकूफ बना रहे दुकानदार, वसूल रहे ज्यादा पैसे

    देसी मुर्गा या बंगाल का बहुरुपिया? देखिए कैसे देसी मुर्गा के नाम पर लोगों को बेबकूफ बना रहे दुकानदार, वसूल रहे ज्यादा पैसे

    पाकुड़ (PAKUR):  पाकुड़ जिले के विभिन्न स्थानीय बाजारों में  देसी मुर्गा खरीदने जा रहे ग्राहकों के लिए बड़ी चेतावनी — "देसी मुर्गा" कहकर दुकानदार खुलेआम पश्चिम बंगाल के फॉर्म में पले मुर्गों को बेच रहे हैं. ये मुर्गे देखने में भले ही देसी जैसे दिखते हों, लेकिन असलियत में इनका स्वाद, पोषण और गुणवत्ता देसी मुर्गे से कोसों दूर है.

    क्या है पूरा मामला?

    THE NEWS POST के टीम ने जब हिरणपुर बाजार का दौरा किया, तो पता चला कि कई दुकानदार बंगाल से लाए गए फार्म मुर्गों को ही "देसी मुर्गा" के नाम से ₹600–₹700 प्रति किलो की दर से बेच रहे हैं. जबकि इनकी असली कीमत ₹300–₹400 प्रति किलो होती है. ग्राहकों को इसकी भनक तक नहीं लगती, क्योंकि ये मुर्गे देखने में गांव के मुर्गों जैसे ही होते हैं.

    विशेषज्ञों की राय

    पोल्ट्री विशेषज्ञों के मुताबिक, असली देसी मुर्गा वह होता है जिसे प्राकृतिक वातावरण में पाला जाता है. बिना किसी रसायनिक दवाओं के. इसका मांस स्वादिष्ट, ताकतवर और पोषण से भरपूर होता है. जबकि फार्म मुर्गा वजन बढ़ाने के लिए दवाओं और सप्लीमेंट्स पर निर्भर होता है.

    स्वाद में भी है बड़ा अंतर

    स्थानीय रसोइयों और ग्राहकों का कहना है कि देसी मुर्गे का स्वाद गहरा और अलग होता है, जो फार्म मुर्गे में नहीं मिलता.

    ग्राहक सावधान रहें. "देसी" नाम के झांसे में न आएं. खरीदते वक्त मुर्गे का स्रोत, वजन और गुणवत्ता की जानकारी लें. THE NEWS POST से यही संदेश — "सावधान रहें, सतर्क रहें, सेहत के साथ समझौता न करें."

    रिपोर्ट: नंद किशोर मंडल/पाकुड़


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