झारखंड: कार्य में लापरवाही बरतने वाले 804 हेड मास्टर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू
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रांची(RANCHI): समग्र शिक्षा के आगामी बजट एवं वार्षिक कार्य योजना के निर्माण के लिए कराये जाने वाले शिशु पंजी सर्वे से पूर्व कराये जाने वाले हैबिटेशन मैपिंग में लापरवाही बरतने के मामले में राज्य के 804 सरकारी विद्यालयों के विरुद्ध कार्रवाई की जायेगी. हैबिटेशन मैपिंग के डाटा को डहर पोर्टल में अपलोड करने का कार्य दिनांक 6 दिसंबर, 2025 तक पूरा किया जाना था. लेकिन राज्य के 804 सरकारी एवं सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों ने इस संबंध में अबतक हैबिटेशन मैपिंग का कार्य पूरा नहीं किया है.
इन विद्यालयों के प्रधानाचार्यो के विरुद्ध अब विभागीय कार्रवाई शुरू की गयी है. विद्यालयों को स्पष्टीकरण जारी किया गया है. अबतक राज्य के 96.6% विद्यालयों ने लक्ष्य के अनुरूप हैबिटेशन मैपिंग का कार्य पूर्ण कर लिया है..
राज्य में दिनांक 11 दिसंबर, 2025 से शुरू हुए शिशु पंजी सर्वे की समयावधि को भी विस्तारित किया गया है. इसे बढ़ाकर दिनांक 15 फरवरी, 2026 कर दिया गया है. राज्य में अबतक 19,060 स्कूलों ने शिशु पंजी सर्वे का कार्य पूर्ण कर लिया है, यह लक्ष्य का 55.4% है. 12,253 विद्यालयों में यह कार्य जारी है, जबकि 3,065 विद्यालयों ने अबतक शिशु पंजी शुरू सर्वे का कार्य शुरू नहीं किया है. पहली बार डहर 2.0 पोर्टल और एप के माध्यम से क्रियान्वित हो रहे शिशु पंजी सर्वे के शुरूआती सर्वेक्षणों के नतीजे उत्साहजनक है. अब तक 24,140 आउट ऑफ स्कूल बच्चों की पहचान की जा चुकी है. ये वे बच्चे हैं जो बाल मजदूरी में फंसे थे, अनाथ या एकल अभिभावक के साथ जीवन जी रहे थे, घुमंतू या प्रवासी परिवारों से थे, ईंट-भट्ठों, होटल-ढाबों, रेलवे स्टेशनो में काम कर रहे थे, भीख मांगने को मजबूर थे, सफाईकर्मियों के बच्चे थे या अन्य किसी गंभीर रोग से ग्रस्त तथा ऐसे अन्य बच्चे जो किन्ही कारणवश स्कूल से ड्राप आउट हो गए थे. विभाग का स्पष्ट लक्ष्य है एक भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे. इसी सोच के साथ इन सभी बच्चों को लक्ष्य के अनुरूप विद्यालय से जोड़ने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं.
विभिन्न विभागों से भी लिया जा रहा है समन्वय
3-18 आयुवर्ग के आउट ऑफ़ स्कूल/ड्राप आउट बच्चो के चिन्हितीकरण, नामांकन एवं मुख्यधारा से उन्हें जोड़ने के लिए राज्य सरकार के विभिन्न विभागों एवं स्वयंसेवी संस्थाओ से भी समन्वय स्थापित कर आवश्यक सहयोग लिया जा रहा है. इनमे यूनिसेफ, बाल संरक्षण आयोग, पुलिस विभाग, श्रम विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग, समाज कल्याण विभाग, उद्योग विभाग, ग्रामीण विकास संस्थान, नगर विकास एवं आवास विभाग, पंचायती राज विभाग, कल्याण विभाग शामिल है. इस संबंध में उक्त सभी विभागों एवं स्वयंसेवी संस्थाओ के प्रतिनिधियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की गयी है.
ऑनलाइन हो रहा है शिशु पंजी सर्वे
शिशु पंजी सर्वे को डिजिटल रूप देने के लिए इस बार स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा 'DAHAR 2.0' (डिजिटल एप्लीकेशन फॉर होलिस्टिक एक्शन प्लान एंड रिव्यु फॉर आउट ऑफ़ स्कूल चिल्ड्रन) मोबाइल एवं वेब बेस्ड एप्लीकेशन तैयार किया गया है. प्रभाग प्रभारी श्रीमती बिनीता तिर्की ने कहा कि इस पोर्टल के माध्यम से सर्वे में प्राप्त 3-18 आयु वर्ग के बच्चो के विद्यालय में नामांकन, ड्राप आउट का पता लगाया जा रहा है. प्रत्येक सरकारी शिक्षकों एवं गैर सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों को DAHAR 2.0 के माध्यम से शिशु पंजी सर्वे ऑनलाइन करना है. पोर्टल में प्राप्त प्रतिवेदनों के आधार पर आउट ऑफ़ स्कूल बच्चो की संख्या ज्ञात की जाएगी एवं इससे सम्बंधित डाटा भारत सरकार को भेजा जायेगा. सर्वे में बच्चो के ड्राप आउट के कारणों का भी पता लगाया जाएगा.
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