देवघर: बीड़ी मजदूरों का न्यूनतम मजदूरी ढाई सौ नहीं हुआ तो होगा उग्र आंदोलन

    देवघर: बीड़ी मजदूरों का न्यूनतम मजदूरी ढाई सौ नहीं हुआ तो होगा उग्र आंदोलन

    देवघर(DEOGHAR): देवघर समाहरणालय के समक्ष झारखंड बीड़ी मजदूर पंचायत संघ द्वारा विशाल धरना दिया गया. कई सूत्री मांगों को लेकर आयोजित धरना का मुख्य उद्देश्य मजदूरी बढ़ाने से लेकर अन्य हैं. 

    अब होगी आर पार की लड़ाई

    देवघर जिला में लगभग 40 हज़ार बीड़ी मजदूर है. जो प्रतिदिन बीड़ी बनाकर अपना जैसे तैसे जीविकोपार्जन कर रहे हैं. पिछड़ा,अति पिछड़ा अल्पसंख्यक समेत गई ऐसे वर्ग हैं जो प्रतिदिन बीड़ी बनाते हैं. इन मजदूरों को 1000 बीड़ी बनाने पर महज 100 रुपिया मजदूरी मिलती है. 1000 बीड़ी बनाने में 14 से 17 घंटे का समय लगता है फिर भी इनकी मजदूरी मात्र 100 रुपिया ही है. ऐसे में झारखंड बीड़ी मजदूर पंचायत संघ द्वारा अपनी मांगों के समर्थन में समाहरणालय के समक्ष धरना दिया गया. इस दौरान केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर विरोध दर्ज कराया गया. बीड़ी मजदूरों की माने तो 1000 बीड़ी बनाने पर 100 रुपये की मजदूरी मिलती है. जबकि उसमें से 22 रुपिया सरकार को टैक्स दिया जाता है. मजदूरों का मानना है कि ऐसे में हम लोगों का भरण पोषण कैसे होगा. उचित मांग के खिलाफ में आज धरना प्रदर्शन किया जा रहा है. साथ ही साथ झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी योजना अबुआ आवास की सारी मापदंड पूरा करने वाले बीड़ी मजदूरों को भी प्राथमिकता नहीं दिया गया है. बीड़ी मजदूरों का मानना है कि इतना कठिन कार्य करने के बावजूद भी न के बराबर हमलोगों को मजदूरी मिलती है. 

    ढाई सौ करो मजदूरी नहीं तो होगा आंदोलन

    देवघर जिला में बड़ी संख्या में बीड़ी मजदूर प्रतिदिन लाखों की संख्या में बीड़ी बनाते हैं.  लेकिन उनकी मजदूरी महज न के बराबर है.  हजार रुपए बीड़ी बनाने पर 100 रुपया ही मजदूरी मिलती है ऐसे में यह मजदूर 250 रुपिया प्रति हजार बीड़ी बनाने की मांग कर रहे हैं. इसके अलावा पूर्व की सरकार इनके लिए आवास की योजना स्वीकृत की थी जिसमें से कई लोगों को मिला था. लेकिन अभी यह योजना ठप हो गई है. अबुआ आवास योजना की सभी मापदंड की आहर्ता पूरी करने वाले यह बीड़ी मजदूर को भी झारखंड सरकार द्वारा प्राथमिकता नहीं दी गई है. ऐसे में आक्रोशित बीड़ी मजदूर द्वारा धरना दिया गया और सरकार से सभी योजनाओं का लाभ देने की मांग की गई. साथ ही  बीड़ी मजदूर के बच्चे के लिए अलग स्कूल खोलने की भी मांग की गई है. 

     रिपोर्ट: रितुराज सिन्हा 


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