राज्य में संकट में पहुंचा क्रसर उद्योग, चैंबर ने सरकार के समक्ष रखी मांग

    राज्य में संकट में पहुंचा क्रसर उद्योग, चैंबर ने सरकार के समक्ष रखी मांग

    रांची(RANCHI): झारखंड में क्रशर उद्योग से जुड़ी समस्या एक बार फिर सरकार और व्यापार जगत के बीच चर्चा का केंद्र बन गई है. उद्योग से जुड़े नियमों में दूरी संबंधी के कारण संचालन पर संकट गहरा गया है, जिससे हजारों मजदूरों की आजीविका प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है. 

    इसी मुद्दे को लेकर आज झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर से मुलाकात की. बैठक में उच्च न्यायालय में लंबित जनहित याचिका (PIL – आनंद कुमार बनाम झारखंड सरकार) के संदर्भ में खनन पट्टों और क्रशर इकाइयों के लिए निर्धारित 400 मीटर एवं 500 मीटर दूरी मानदंडों के प्रभाव पर विस्तार से चर्चा हुई.

    प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि इन नियमों के चलते बड़ी संख्या में क्रशर यूनिट्स प्रभावित हुई हैं, जिससे न सिर्फ उद्योग बंदी की स्थिति में है, बल्कि इससे जुड़े हजारों श्रमिकों की रोज़ी-रोटी पर भी गंभीर संकट खड़ा हो गया है. इसके साथ ही राज्य सरकार को संभावित राजस्व नुकसान और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं पर पड़ने वाले असर को लेकर भी चिंता जताई गई. चैंबर अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा ने बैठक में सरकार से इस मामले में शीघ्र और व्यावहारिक समाधान निकालने की अपील की. उन्होंने कहा कि यदि स्थिति पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो इसका असर राज्य की औद्योगिक गतिविधियों पर लंबे समय तक रह सकता है.

    वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुनते हुए सकारात्मक रुख अपनाया और मामले पर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया.
    इस दौरान प्रतिनिधिमंडल में चैंबर अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा, महासचिव रोहित अग्रवाल, सह सचिव रोहित पोद्दार, उप समिति चेयरमैन नितेश शारदा, डॉ. अनल सिन्हा सहित क्रशर व्यवसायी मोइज अख्तर, गौरव अहूजा, राम रतन महर्षि और संदीप कुमार मौजूद रहे.



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