झारखंड में आदिवासियों के वजूद पर संकट, घटती आबादी से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन चिंतित, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखी चट्ठी

    झारखंड में आदिवासियों के वजूद पर संकट, घटती आबादी से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन चिंतित, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखी चट्ठी

    टीएनपी डेस्क(Tnp desk):-ईडी के समन के सामना कर रहे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन परेशानियों से तो जुझ ही रहे हैं, उनके लिए ये वक्त चुनौतियों के साथ-साथ एक तगड़ा इम्तहान देने का भी है. लगातार विपक्ष के हमले से सूबे के मुखिया हेमंत तो मुश्किलों में घिरे दिख रहे हैं. इस बीच झारखंड में तेजी से आदिवासियों की घटती आबादी पर भी उन्होनें चिंता जाहिर की है. इसे लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को चिट्ठी लिखी है औऱ सरना आदिवासी धर्म कोड लागू करने की गुजारिश की है.

    झारखंड में घट रही आदिवासियों की आबादी

    हेमंत सोरेन ने राज्य में घटती आदिवासी समुदाय की जनसंख्या पर चिंताई है. उन्होंने पीएम को लिखी अपनी चिट्ठी में बताया कि प्रदेश में ऐसे कई आदिवासी समुदाय हैं, जिनका अस्तित्व खतरे में है. अपने पत्र में इस बात का जिक्र किया कि पिछळे आठ सालों में आदिवासियों की संख्या में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है. उनकी जनसंख्या 38 से घटकर 26 प्रतिशत हो गई है. निरंतर हो रही ये गिरावट चिंता का विषय है . जिसे गंभीरता से सोचने की जरुरत है. उन्होंने जोर देकर इस बात का भी जिक्र किया कि इस वजह से संविधान की पांचवीं और छठी अनुसूची के तहत आदिवासी विकास की नीतियों में नकारात्मक प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है. मुख्यमंत्री ने बताया कि ऐसे में अन्य धर्मों से अलग प्रकृति की पूजा करने वाला आदिवासी समुदाय की पहचान और उनके संरक्षण के लिए सरना धर्म कोड जरुरी है. उनकी माने तो अगर सरना धर्म कोड लागू हो जाने से इनकी जनसंख्या साफ तौर पर पता चल पायेगी.

    सरना आदिवासी धर्म कोड

    सरना धर्म के बारे में अपनी चिट्ठी में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बताया कि 1951 की जनगणना के कॉलम में इनके लिए अलग कोड की व्यवस्था थी. लेकिन, कुछ वजहों से दशकों बाद ये व्यवस्था समाप्त कर दी गई. उन्होंने लिखा आदिवासी सरना धर्मकोड को झारखंड विधानसभा में पारित कराया गया है. फिलहाल, यह केन्द्र सरकार के स्तर पर निर्णय लेने के लिए लंबित है. अपने पत्र में सीएम ने दुनिया में बढ़ते प्रदूषण और पार्यवरण की रक्षा को लेकर भी चिंता का इजहार किया . उनका कहना था कि जिस धर्म की आत्मा ही प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा करने के लिए है. लिहाजा, उसको मान्यता मिलने से भारत ही नहीं पूरे विश्व में प्रकृति से प्रेम का संदेश फैलेगा.

     

     


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