धनबाद में अपराधी बेकाबू, जानिए घात लगाए अपराधियों ने चर्चित रिकवरी एजेंट को कैसे मारी गोली

    धनबाद में अपराधी बेकाबू, जानिए घात लगाए अपराधियों ने चर्चित रिकवरी एजेंट को कैसे मारी गोली

    धनबाद (DHANBAD) : धनबाद में बेकाबू अपराध ने बुधवार की सुबह एक और जान ले ली. बुधवार की सुबह चर्चित रिकवरी एजेंट उपेंद्र सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई. यह घटना सरायढेला थाना क्षेत्र के पीके राय कॉलेज परिसर में घटी. उपेंद्र सिंह बाइक से अपने बेटे को छोड़ने कॉलेज गए थे कि टोह में बैठे अपराधियों ने उन पर गोलियां दाग दी. गोली लगने के बाद उन्होंने भागने की कोशिश की, लेकिन ज्यादा दूर नहीं जा सके और गिर गए. गिरने के बाद कॉलेज के छात्र और उनका बेटा पहुंचा और उन्हें आनन-फानन में धनबाद के SNMMCH में ले जाया गया. जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. उनके साथ के लोगों को भरोसा नहीं हुआ, फिर वह एंबुलेंस से उपेंद्र सिंह को धनबाद के अशर्फी अस्पताल ले गए, लेकिन वहां भी डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. उपेंद्र सिंह का हमलावर पहले से ही इंतजार कर रहे थे. जैसे ही उन्होंने अपने बेटे को उतारा, हत्यारों ने गोली मार दी और गोली मार कर चलते बने. बाइक से पहुंचे हमलावरों ने हेलमेट पहन रखा था.

    रिश्तेदारों के साथ-साथ वासेपुर के गैंगस्टर प्रिंस खान से भी था विवाद

    उपेंद्र सिंह का अपने रिश्तेदारों के साथ-साथ वासेपुर के गैंगस्टर प्रिंस खान से भी विवाद था. प्रिंस खान से भी उनकी अदावत चल रही थी. उन पर पहले भी हमला हुआ था. बरही में हाल के दिनों में उन पर फायर किया गया था. लेकिन संयोग से वह बच गए. अपने गांव जाने के लिए बरही के होटल में परिवार के साथ खाना खा रहे थे कि उन्हें निशाना बनाकर गोली चलाई गई. लेकिन वह बच गए. इस घटना में उन्होंने प्रिंस खान समेत उसके कुनबे के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी. हमला करने वाले हाई स्पीड बाइक से पहुंचे थे. पुलिस ने वहां से 9 एमएम का खोखा, एक मैगजीन और एक कारतूस बरामद किया था. अभी हाल के दिनों में एनआईए ने भी उपेंद्र सिंह के घर छापेमारी की थी. हत्या किसने की अथवा किसने कराई, इसकी जांच तो पुलिस कर रही है लेकिन ताबड़तोड़ हत्या की घटनाओं से धनबाद पूरी तरह से दहशत में है. मंगलवार की सुबह ही पत्थर कारोबारी की कालूबथान थाना क्षेत्र में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. उसके ठीक 24 घंटे के बाद उपेंद्र सिंह की हत्या की गई.

    रिपोर्ट : सत्यभूषण सिंह, धनबाद



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