Congress: रांची ही नहीं, धनबाद कांग्रेस में भी "कट टू साइज "को लेकर दिलचस्प रस्साकशी,कौन किस पर पड़ेगा भारी

    Congress: रांची ही नहीं, धनबाद कांग्रेस में भी "कट टू साइज "को लेकर दिलचस्प रस्साकशी,कौन किस पर पड़ेगा भारी

    धनबाद(DHANBAD) | कांग्रेस में प्रदेश से लेकर जिला स्तर तक  एक दूसरे को "कट टू साइज " करने का जबरदस्त और दिलचस्प खेल चल रहा है.  प्रदेश में मंत्री और विधायक दल के नेता में ठनी  हुई है, संगठन पूरी तरह से चुप है.  इधर, धनबाद में भी लगभग वही हाल है.  14 दिसंबर को दिल्ली में "वोट चोर  गद्दी  छोड़" कार्यक्रम के तहत   प्रदर्शन की तैयारी है.  इस प्रदर्शन में झारखंड के प्रदेश से लेकर जिला स्तर के नेता, कार्यकर्ता- पदाधिकारी दिल्ली कूच  कर गए है.  धनबाद का मामला इसलिए दिलचस्प हो गया है कि यहां जिला अध्यक्ष के खिलाफ एक समानांतर गुट  तैयार हो गया है और फिलहाल कौन किस पर भारी पड़ रहा है या आगे पड़ेगा, यह दिखाने की खूब कोशिश हो रही है.  झारखंड कांग्रेस में अभी हाल ही में 25 जिलों के अध्यक्ष की घोषणा हुई थी.  लेकिन कम से कम आधा दर्जन जिलों में विवाद चल रहा है. 

    घोषित अध्यक्षों की पीठ पर विधायकों के हाथ होने के है आरोप 
     
    घोषित अध्यक्षों की पीठ पर विधायकों का हाथ होने के आरोप लग चुके है.  इधर, धनबाद में मामला इसलिए भी दिलचस्प हो गया है कि दोनों गुट  सोशल मीडिया पर दिल्ली रवानगी की अपनी-अपनी तस्वीर डाले है.  जिला अध्यक्ष संतोष सिंह ने धनबाद रेलवे स्टेशन का अपने लगभग डेढ़ दर्जन समर्थकों के साथ एक तस्वीर पोस्ट की है.  कहा है कि कांग्रेस के महारैली वोट चोर  गद्दी  छोड़ कार्यक्रम के लिए दिल्ली रवाना हुए.  फिर क्या था, समांनातर गुट   कहां पीछे रहने वाला है.  वह भी   तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया  है.  कहा जाता है कि पूर्व प्रखंड अध्यक्ष पप्पू पासवान की अगुवाई में सैकड़ो कार्यकर्ता बस से दिल्ली के लिए रवाना हुए है.  पप्पू पासवान ने अपने सोशल मीडिया पर बस  और समर्थकों के साथ तस्वीर पोस्ट किया  है.  बताया जाता है कि  की इस गुट की बस  धनबाद प्रखंड से खुलकर दिल्ली पहुंचेगी और  वहां बताने की कोशिश होगी कि कौन कितना ताकतवर है.  मतलब दिलचस्प रस्साकशी चल रही है.  बता दे कि  संतोष सिंह के जिला अध्यक्ष बनने के बाद विवाद  चल रहा है. 

    नाराज  गुट  का एक पैर धनबाद तो दूसरा दिल्ली में है ,आखिर क्या है वजह 
     
    नाराज  गुट  का कहना है कि उन लोगों ने रायशुमारी में संतोष सिंह के नाम का समर्थन नहीं किया,  फिर भी पता नहीं ,कैसे, संतोष सिंह जिला अध्यक्ष बन गए.  उसके बाद से ही विवाद गहरा गया है. नाराज गुट   पहले रांची  जाकर कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी से बातचीत की.  उन्हें वस्तु स्थिति से अवगत कराया, फिर वह दिल्ली तक गए और राष्ट्रीय कार्यालय में धरना प्रदर्शन किया.  संगठन महामंत्री से लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष से भी मुलाकात की.  अंदरखाने के सूत्र बताते हैं कि दरअसल दिलचस्प रस्साकशी का खेल इसलिए  भी जारी है कि नाराज गुट  को भरोसा मिला था कि 3 महीने तक अध्यक्ष के कार्यकाल को देखा जाएगा, फिर उसकी समीक्षा होगी. 

    धनबाद कांग्रेस के नाराज गुट को कौन सा भरोसा दे रहा "संजीवनी ",पढ़िए !!
     
    उसके बाद ही कोई कार्रवाई की जा सकेगी और यही भरोसा नाराज गुट  के लिए "संजीवनी" का काम कर रहा है.  इस भरोसे से नाराज  उत्साहित हैं और लगातार अपनी बातों को कांग्रेस के वरीय  नेताओं तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे है.  सोशल मीडिया तो कांग्रेस विवाद का भी अखाड़ा बन गया है.  कोयलांचल की राजनीति अपनी रफ्तार से चलती है.  दल चाहे कोई भी हो, नेता चाहे कोई भी हो, सबकी अपनी-अपनी पहुंच और पकड़ होती है.  उसी के आधार पर कोयलांचल  की राजनीति चमकती  है.  दल चाहे कोई भी हो, कोई इससे  अछूता नहीं है.  यह  अलग बात है कि दिल्ली की रैली में धनबाद कांग्रेस से कई लोग अपनी-अपनी व्यवस्था से भी गए है.  कुछ लोग आज भी जाएंगे, सबका मकसद आलाकमान  नहीं , तो कम से कम प्रदेश के नेताओं के सामने अपना चेहरा चमकाना  होगा.  इस चेहरे के भरोसे उन्हें आगे क्या लाभ मिलेगा, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 



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