धनबाद(DHANBAD): झारखंड कांग्रेस में उठा बवंडर क्या कोई गुल खिलाएगा या फिर आलाकमान के आंख तैरेरने के बाद सब कुछ पहले जैसा हो जाएगा? क्या प्रदेश अध्यक्ष हटाए जाएंगे या प्रदेश अध्यक्ष को कोई निर्देश मिलेगा? क्या झारखंड कांग्रेस प्रभारी के राजू झारखंड के कांग्रेसियों को एकसूत्र में बाँध रखने में विफल साबित हो रहे हैं? क्या झारखंड में कांग्रेस के नेताओं की इच्छा इतनी अधिक हो गई है कि वह सरकार में भी और संगठन में भी बराबर- बराबर दखल रखना चाहते हैं? यह सब सवाल राजनीतिक क्षेत्र में लगातार उठ रहे हैं. वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर के बगावती तेवर के बाद कांग्रेस में एक अजीब हलचल देखी जा रही है. हर नेता एक दूसरे को शंका की दृष्टि से देख रहे हैं. सब जानना चाह रहे हैं कि आखिर राधा कृष्ण किशोर क्यों बागी तेवर अख्तियार किए हुए हैं?
पार्टी फोरम पर अपनी बात रखने के बजाय यह सब क्या हुआ
राधा कृष्ण किशोर को अपनी नाराजगी ,जहां पार्टी फोरम पर रखनी चाहिए थी, वहीं उन्होंने झारखंड प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष को लिखी चिट्ठी सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया। एक नहीं, तीन-तीन चिट्ठी पोस्ट की गई. इस बीच पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता राधा कृष्ण किशोर से मुलाकात की और उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व का संदेश भी दिया, लेकिन बात नहीं बनी और फिर एक चिट्ठी जारी हो गई. उसके बाद जैसी की खबर है, शुक्रवार को भी राधा कृष्ण किशोर को मनाने की कोशिश की गई. सूत्रों के अनुसार मंत्री डॉक्टर इरफान अंसारी और पूर्व सांसद धीरज साहू वित्त मंत्री राधा कृष्ण कृष्ण किशोर से मुलाकात की. अंदाज लगाया जा रहा है कि कांग्रेस के मंत्रियों सहित अन्य बड़े नेताओं को "डैमेज कंट्रोल" में लगाया गया है.
राधा कृष्ण किशोर अचानक क्यों हो गए इतने मुखर
बताया जाता है कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी के गठन के बाद राधा कृष्ण किशोर लगातार प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं. उनके फैसलों पर सवाल भी कर रहे हैं. सूत्र बता रहे हैं कि 18 मई तक बयानबाजी रोकने की सलाह दी गई है और उसके बाद प्रदेश प्रभारी से मिलकर अपनी बात स्पष्ट करने पर वित्त मंत्री को राजी कर लिया गया है. वैसे, सूत्र बता रहे हैं कि 18 मई के बाद एक बार फिर कांग्रेस में हलचल तेज हो सकती है. दरअसल, भाषा विवाद की आड़ में और संगठन विस्तार को लेकर कांग्रेस में कोई "नया गेम" शुरू हो सकता है.
अगर यही हाल रहा तो प्लान बी पर भी हो रहा विचार
दिल्ली के सूत्र तो यह भी बता रहे हैं कि अगर झारखंड में कांग्रेस के नेता नहीं सुधरे, तो कांग्रेस के मंत्रियों को मंत्रिमंडल से बाहर कर कांग्रेस हेमंत सरकार को बाहर से समर्थन दे सकती है. इस पर भी दिल्ली में विचार चल रहा है, क्योंकि कई बार आलाकमान कांग्रेस नेताओं को चेता चुका है. कभी विधायकों का दल शिकायत लेकर पहुंच जाता है तो कभी वित्त मंत्री पत्रों को सार्वजनिक करते है. ऐसे में झारखंड कांग्रेस में आगे क्या होगा, यह कहना मुश्कि है. राज्यसभा का चुनाव भी होने जा रहा है. दो सीट खाली हो रही है. कांग्रेस आलाकमान चाह रहा है कि एक सीट कांग्रेस को मिल जाए, लेकिन झमुमो इसे बहुत आसानी से देने के मूड में नहीं है. इसके लिए कोई महीन चाल की तैयारी चल रही है. देखना दिलचस्प होगा कि यह महीन चाल आगे क्या गुल खिलाती है?

