Coal World: रिटायर्ड कोयलाकर्मी पेंशन को लेकर क्यों है चिंतित, क्या थी कोल इंडिया की गोल्डन हैंडशेक योजना !

    Coal World: रिटायर्ड कोयलाकर्मी पेंशन को लेकर क्यों है चिंतित, क्या थी कोल इंडिया की गोल्डन हैंडशेक योजना !

    धनबाद(DHANBAD) : कोयलाकर्मियों के पेंशन फंड को लेकर धनबाद से लेकर दिल्ली तक चर्चा चल रही है. पैंशनर्स एसोसिएशन भी इसको लेकर मुखर है. पेंशन फंड की कमी से पेंशनर्स चिंतित भी है. कोल पैंशनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रामानुज प्रसाद ने भारत सरकार और कोल इंडिया से पेंशन फंड की कमी को दूर करने की मांग की है. उन्होंने भारत सरकार और कोल इंडिया को पेंशन फंड की कमी के लिए जिम्मेदार बताया है. उन्होंने यह भी कहा है कि कोल इंडिया  ने गोल्डन हैंड शेक योजना लाकर श्रम शक्ति को बिल्कुल घटा दिया. फिर कोयला उद्योग में आउटसोर्सिंग कंपनियों को लाया गया. रेगुलर कर्मियों की सेवानिवृत्ति के बाद उनके पद को खत्म कर दिया गया.  

    श्रम शक्ति आठ लाख  से घटकर 2 लाख के आसपास आ गई

    इस वजह से श्रम शक्ति आठ लाख से घटकर 2 लाख के आसपास आ गई और पेंशनर्स की संख्या लगभग 6 लाख हो गई. उन्होंने यह सवाल भी उठाया है कि वर्तमान समय में रिटायर्ड कर्मियों का पेंशन बहुत अधिक है. यह भी पेंशन फंड में कमी की एक बड़ी वजह है. बता दें कि गोल्डन हैंड शेक योजना कोल इंडिया ने ढाई दशक पूर्व लाया था. मनसा यही थी कि सरप्लस कर्मचारियों और अधिकारियों को कम किया जाए. इस योजना के तहत जो कर्मचारी अथवा अधिकारी 5-6 साल बाद रिटायर्ड होने वाले थे. उनको पूरा लाभ देकर हटा दिया जाता था. कर्मी और अधिकारियों को भी एकमुश्त अधिक पैसे मिलते थे और रिटायरमेंट का पूरा लाभ भी मिलता था. इस वजह से यह योजना कोल इंडिया में सफल रही. नतीजा हुआ कि कोल इंडिया में कर्मियों की संख्या घट गई. उसके बाद मैनेजमेंट ने उस पद को ही समाप्त कर दिया. 

    वित्तीय वर्ष 24-25 में भी प्रोविडेंट फंड पर 7.6 प्रतिशत ही ब्याज मिलेगा

    इधर, वित्तीय वर्ष 24-25 में भी कोलकर्मियों को प्रोविडेंट फंड पर 7.6 प्रतिशत ही ब्याज मिलेगा. हालांकि सूत्र बताते हैं कि पेंशन फंड को और मजबूत करने पर विचार चल रहा है. बैठकों में सुझाव लिए जा रहे है. एक यह भी महत्वपूर्ण सुझाव है कि कोल इंडिया प्रतिटन उत्पादित कोयले पर 20 से ₹25 तक सेस उपलब्ध कराये. अभी हाल ही में हैदराबाद में हुई बैठक  में फंड मैनेजर के चयन समेत अन्य मुद्दों पर भी चर्चा की गई. बताया गया कि सीएमपीएफओ के पेंशन फंड के निवेश पर नजर रखने के लिए सलाहकार नियुक्त करने का भी निर्णय लिया गया. पीएफ फंड के निवेश से कम आमदनी की वजह से ब्याज दर कम मिलती है. ज्यादा आमदनी होने से ज्यादा ब्याज  मिल सकता है. सीएमपीएफओ में पेंशन फंड की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है. जमा से ज्यादा निकासी होने के कारण लंबे समय तक पेंशन फंड को जिंदा रखने के लिए अतिरिक्त आर्थिक मदद की जरूरत है.  

    कोल इंडिया प्रति टन ₹10 पेंशन फंड में देता है 

    सीएमपीएफओ को कोल इंडिया की ओर से प्रतिटन कोयला उत्पादन पर ₹10 पेंशन फंड के लिए दिया जाता है. इस रकम को 20 से ₹25 तक करने पर जोर दिया जा रहा है. यहां यह भी उल्लेखनीय है कि कोयला खान भविष्य निधि संगठन (CMPF0 ) का अस्तित्व ही खत्म करने की मांग अब उठ गई है. कोल माइंस पेंशनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रामानुज प्रसाद ने कहा है कि हमारी मांग है कि सीएमपीएफओ को कोल इंडिया लिमिटेड में विलय कर दिया जाए और अंशदाता की पेंशन आदि की व्यवस्था कोल इंडिया लिमिटेड करे. इस प्रकार करने से अंशदाता की जमा राशि का 4% प्रशासनिक खर्च भी बचेगा और अंशदाताओं को राशि भी समय पर मिल जाएगी. उन्होंने कहा है कि कोयला खान भविष्य निधि संगठन की स्थापना भारत सरकार के श्रम और नियोजन मंत्रालय के अधीन हुई थी. जिसका उदेश्य अंशदाता का हित सुनिश्चित करना था. संसद से पारित अधिनियम के तहत CM PF miscellaneous rules, 1948 बना था.

    रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो  


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