Coal India: कोयला उद्योग में क्यों मचा हड़कंप,कोयला मंत्रालय ने क्यों किया खबरदार

    Coal India: कोयला उद्योग में क्यों मचा हड़कंप,कोयला मंत्रालय ने क्यों किया खबरदार

    धनबाद(DHANBAD):  देश ही नहीं ,दुनिया की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी कोल इंडिया पर प्रोडक्शन बढ़ाने का भारी दबाव है.  उत्पादन अगर नहीं संतोषजनक बढ़ा  तो कुछ बड़े अधिकारी नप भी सकते हैं.  स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि कोल इंडिया के नए अध्यक्ष बी साईंराम के समक्ष बड़ी चुनौती सामने आ गई है.  वैसे, तो कहा जा रहा है कि सभी कोयला कंपनियों के उत्पादन लक्ष्य की समीक्षा कर उन्हें हिदायत दी गई है कि पिछले साल की तुलना में उत्पादन को आगे बढ़ाएं, लेकिन सूत्र बताते हैं कि ऐसा संभव होता दिख नहीं रहा है. कंपनियां उत्पादन में इतनी पिछड़ गई हैं कि लक्ष्य प्राप्त करना संभव नहीं दिख रहा है.  कोयला मंत्रालय ने भी इसे गंभीरता से लिया है.  

    कोयला मंत्रालय भी अब जाकर हुआ गंभीर 

    कोयला मंत्रालय का कहना है कि देश को अभी कोकिंग कोयले की जरूरत है.  कंपनियों को हर हाल में उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया गया है.  झारखंड में संचालित कोयला कंपनियों का हाल भी बेहाल है.  कोल इंडिया की सबसे बड़ी सहायक कंपनी बीसीसीएल के उत्पादन में 18% से अधिक की गिरावट अंकित हुई है.  सीसीएल में 13 परसेंट का उत्पादन घटा है.  तो ईसीएल  में भी उत्पादन गिरा है.  कोयला मंत्रालय ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि सभी सहायक कंपनियों का अपनी कार्य क्षमता बढ़ाना होगा  और चालू वर्ष के अंत तक उत्पादन पिछले वर्ष के रिकॉर्ड स्तर को पार करना होगा।  यह  अलग बात है कि तर्क यह दिया जा रहा है कि उत्पादन में गिरावट का प्रमुख कारण लंबे समय तक चली मानसूनी बारिश है.  जिस वजह से खनन कार्य प्रभावित हुए हैं.  साथ ही बिजली के क्षेत्र में कोयले की मांग  घट गई है और फिलहाल वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों  का प्रभाव बढ़ रहा है. 

    कई कम्पनियाँ  में शुरू हो गया है कॉस्ट कटिंग 

     इधर, बीसीसीएल में भी कॉस्ट कटिंग का काम शुरू कर दिया गया है.  तो ईसीएल  की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है.  कर्मचारियों के ट्रांसफर  की तैयारी है.  इन कर्मचारियों को कंपनी से बाहर स्थानांतरित करने की तैयारी है.  बताया जा रहा है कि ईसीएल का काम  बैंक से ऋण लेकर  चल रहा है. उल्लेखनीय है कि कोयला उत्पादक कंपनी कोल इंडिया को प्राइवेट प्लेयरो  से भी बड़ी चुनौती मिल रही है.  पावर सेक्टर, कोल इंडिया की कंपनियों से कोयला खरीदने में रुचि नहीं दिखा  रहे हैं.  उनका कहना है कि कोयले की गुणवत्ता ठीक नहीं है.  प्राइवेट प्लेयरो  से कोयला खरीदने में उन्हें लाभ दिख रहा है.  ऐसे में कोल इंडिया को बाजार में बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो


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