कोल इंडिया लिमिटेड गैर कोयला क्षेत्र में करेगी निवेश साथ ही जानिए धनबाद में प्रदूषण का हाल

    कोल इंडिया लिमिटेड गैर कोयला क्षेत्र में करेगी निवेश साथ ही जानिए धनबाद में प्रदूषण का हाल

    धनबाद (DHANBAD): 2070  तक पावर प्लांटों ने नॉन कोकिंग कोल का उपयोग बंद करने की दिशा में कोल इंडिया लिमिटेड ने काम करना शुरू कर दिया है.  जैसी की जानकारी है कंपनी अगले चार-पांच वर्षों में गैर कोयला क्षेत्र में 18000 करोड़ रुपया निवेश करेगी. बुधवार को नीति आयोग के साथ कोल इंडिया की बैठक में यह सब तय हुआ है.  कोल इंडिया लिमिटेड कोल गैसीफिकेशन की दिशा में भी आगे बढ़ चुकी है. इसका ऊर्जा के रूप में उपयोग होगा.  फायदा यह होगा कि प्रदूषण कम होगा, इसके अलावा कोल इंडिया लिमिटेड सोलर प्रोजेक्ट पर भी काम कर रही है. 

    सोलर प्रोजेक्ट लगाएंगी अनुषंगी कंपनियां  
     
    विश्वस्त सूत्रों के अनुसार प्रत्येक अनुषंगी कंपनियों को सोलर प्रोजेक्ट लगाने को कहा गया है.  इसके अलावे राजस्थान में सौर ऊर्जा का एक बड़ा प्रोजेक्ट शुरू करने की प्रक्रिया शुरू की गई है. सूत्रों के अनुसार कोल इंडिया अल्मुनियम, लिथियम सहित क्रिटिकल मिनरल के खनन की योजना पर भी काम कर रही है.  ओड़िसा में बॉक्साइट खनन का भी निर्णय हुआ है.  इसके लिए रोड मैप तैयार किया जा रहा है. आपको बता दें कि देश में अभी कोयले का रिज़र्व तो है, लेकिन नन कोकिंग कोल के उपयोग के कारण होने वाले प्रदूषण से देश ही नहीं बल्कि विदेशी भी चिंतित है.  धनबाद की बात अगर करें तो देश के प्रदूषित शहरों के टॉप टेन में धनबाद का नाम आता है. 

    कोयले के खनन से लेकर कोकिंग और नन कोकिंग कोल पर आधारित उद्योगों के कारण भी  प्रदूषण फैलता है.  धनबाद में रजिस्टर्ड 108 हार्ड कोक भट्ठे  है.  हालांकि सभी अभी चल नहीं रहे है.आपको बता दे कि कोल डस्ट के कारण अस्थमा, सिलकोसिस, टीबी एवं लंग्स जैसी बीमारियां होती है. 

    क्या हो रहा है प्रभाव और कैसे हम हो रहे प्रभावित  
     
    प्रतिवर्ष मिल रहे लगभग 250 टीबी के मरीज, डस्ट से एलर्जी वाले मरीजों को अधिक करता है प्रभावित,-नेत्ररोग की बीमारी भी बढ़ी, आंख में पीलापन, प्रदूषित हवा के कारण पानी भी प्रदूषित होता है.  धनबाद का एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी एक्यूआइ 186 दर्ज किया गया है.  यह राष्ट्रीय मानक 100 माइक्रोग्राम क्यूबिक मीटर (एमजीसीएम) से कहीं अधिक है.  इसमें पीएम-2.5 का स्तर 169.1 और पीएम-2.5 का स्तर 181.5 दर्ज किया गया है. 

    एयर क्वालिटी इंडेक्स का स्तर और प्रभाव-- शून्य से 50 : अच्छा, 51 से 100 : संतोषजनक, 101 से 200 : असंतोषजनक, 201 से 300 : खराब, 301 से 400 : बहुत खराब, 401 से 500 : अतिगंभीर (एक्यूआइ का राष्ट्रीय मानक 100 माइकोग्राम प्रति घन मीटर निर्धारित है). 

    धनबाद के कुछ इलाकों में पीएम 10 का स्तर

    डिगवाडीह 158.45,जोड़ापोखर 156.02,झरिया कतरास मोड़ 210.46,गोधर 220.68,कुसुंडा 200.24,करकेंद 196.23,पुटकी 204.27,सिजुआ 187.26,कतरास भगत सिंह चौक 201.18,महुदा 230.23,बैंक मोड़ 208.96,श्रमिक चौक 190.86,सिटी सेंटर 170.64,रणधीर वर्मा चौक 150.04,आइआइटी गेट 166.46,स्टील गेट 174.72,बिग बाजार 156.51,गोविंदपुर 198.26,बस स्टैंड 187.37
     (पीएम 10 का स्तर अधिकतम 100 होना चाहिए.)

    आप भी जानिए क्या है पीएम

    पीएम यानी पार्टिकुलेट मैटर प्रदूषण की एक किस्म है. इसके कण बेहद सूक्ष्म होते हैं ,जो हवा में बहते हैं. पीएम 2.5 या पीएम 10 हवा में कण के साइज़ को बताता है. आम तौर पर हमारे शरीर के बाल पीएम 50 के साइज़ के होते हैं. इससे आसानी से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि पीएम 2.5 कितने बारीक कण होते होंगे. 24 घंटे में हवा में पीएम 2.5 की मात्रा 60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर होनी चाहिए.हवा में मौजूद यही कण हवा के साथ हमारे शरीर में प्रवेश कर ख़ून में घुल जाते है. इससे शरीर में कई तरह की बीमारी जैसे अस्थमा और सांसों की दिक्क़त हो सकती है.बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बूढ़ों के लिए ये स्थिति ज़्यादा ख़तरनाक होती है.


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