CMPFO:कोल इंडिया के पांच लाख रिटायर्ड कर्मियों की क्यों हो गई है नींद हराम,अब आगे क्या !

    CMPFO:कोल इंडिया के पांच लाख रिटायर्ड कर्मियों की क्यों हो गई है नींद हराम,अब आगे क्या !

    धनबाद(DHANBAD):कोल इंडिया में कार्यरत कर्मचारियों की संख्या तेजी से घट रही है और रिटायर्ड कर्मियों की संख्या बढ़ रही है.  आंकड़े के मुताबिक कोल इंडिया में कार्यरत कर्मियों की संख्या लगभग 2.10 लाख है, तो रिटायर्ड कर्मियों की संख्या 5 लाख के करीब पहुंच गई है.  नतीजा है कि कोल माइंस प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन (सीएमपीएफओ) पर भारी दबाव बढ़ गया है.  फंड  की कमी का बोझ बढ़ता जा रहा है.  हर साल लगभग 240 करोड रुपए की कमी हो रही है.  यह संस्थान के लिए गंभीर स्थिति कही जा सकती है.  

    पेंशन फंड की बिगड़ती हालत पर सबकी चिंता 

    इधर, जानकारी मिली है कि पेंशन फंड की बिगड़ती हालत को देखते हुए परिसंपत्तियों को बेचने का प्रस्ताव सामने आया है.  सूत्र बताते हैं कि पिछले दिनों पेंशन फंड को स्थिरता देने के लिए उच्च स्तरीय समिति में इस बात पर चर्चा हुई.  इस बैठक की एक रूपरेखा भी तैयार की गई.  उसके अनुसार सीएमपीएफओ को हर साल 240 करोड़ का नुकसान हो रहा है.  कोयला कर्मियों की ज्यादा सेवानिवृत्ति के कारण कार्यरत कर्मियों की संख्या घट रही है.  इस वजह से जमा राशि से अधिक की निकासी हो रही है. 

    बैठक में और कई आये हैं सुझाव 
     
    इस बैठक में यह भी सुझाव दिया गया कि कोल्  कंपनियों में नई बहाली को एनपीएस या अन्य योगदान आधारित प्रणाली में शामिल किया जाए.  लेकिन इसमें सबसे बड़ी समस्या है कि मौजूदा फंड पर दबाव और अधिक बढ़ जाएगा।  विचार आया कि सीएमपीएफओ की अनुपयोगी संपत्तियां को बेचकर पेंशन फंड में इसे स्थानांतरित कर दिया जाए.  हालांकि यह सब प्रस्ताव है, केंद्र सरकार के निर्णय के बाद ही इस पर कुछ हो सकता है.  यह  अलग बात है कि कोल इंडिया से रिटायर्ड कर्मचारी पेंशन की रकम से संतुष्ट नहीं हैं.  वह लगातार पेंशन की रकम की समीक्षा करने की मांग कर रहे हैं.  ऐसे में नए-नए प्रस्ताव सामने आने से उनकी चिंताएं बढ़ाना बहुत स्वाभाविक है.  देखना होगा कि आगे क्या फैसला होता है??



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