शहर की सरकार: निकाय चुनाव के बहाने झामुमो का शहरी इलाकों पर फोकस, अब क्या करेगी कांग्रेस !


धनबाद (DHANBAD) : झामुमो का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में पार्टी पहले से ही बेहद मजबूत है. अब शहरी इलाकों में पार्टी का फोकस होगा. मतलब झारखंड में 48 निकाय चुनाव में झामुमो और कांग्रेस में टकराव की स्थिति भी बन सकती हैं. झामुमो अपने उम्मीदवारों की घोषणा करना शुरू कर दिया है. कांग्रेस ने तो उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है, लेकिन उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. यह अलग बात है कि चुनाव दलीय आधार पर नहीं होगा, फिर भी पार्टियों की कोशिश है कि समान विचारधारा वाले दलों से कोई एक ही उम्मीदवार मैदान में उतरे. यह अलग बात है कि अंदरखाने उम्मीदवारों के चयन और उन्हे मनाने के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं. लेकिन प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर अभी कोई निर्णय सामने नहीं आया है. इस बीच देखा जा रहा है कि रांची से लेकर धनबाद तक कांग्रेस और झामुमो में टकराव की स्थिति बनती दिख रही है.
रांची से लेकर धनबाद तक टकराव की हालात
रांची में भी कांग्रेस की उम्मीदवार मैदान में उतरने का मन बना चुकी है, तो झामुमो भी वहां से प्रत्याशी दे सकता है. लगभग वही स्थिति धनबाद में भी है. धनबाद में तो झामुमो की जिला समिति ने पार्टी उम्मीदवार की घोषणा कर दी है. अब यहां कांग्रेस भी उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया में आगे बढ़ा रही है. ऐसे में आगे क्या होगा, यह कहना कठिन है. लेकिन इतना तो तय है कि निकाय चुनाव में इस बार झामुमो कांग्रेस से आगे-आगे चल रहा है. लगातार उम्मीदवारों की घोषणाएं हो रही हैं. यह अलग बात है कि चुनाव की तिथि अभी घोषित नहीं हुई है, लेकिन तैयारी शुरू कर दी गई है. शहर की सरकार में जिस पार्टी का जितना अधिक दबदबा होगा, वह उतनी ही मजबूत मानी जाएगी. पिछले निकाय चुनाव में चास और देवघर को छोड़कर सभी में मेयर की कुर्सी भाजपा समर्थक के खाते में गई थी. इस बार के विधानसभा चुनाव में भाजपा को करारी हार मिली और झामुमो सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी.
ग्रामीण की तरह शहरी इलाकों में भी झामुमो बढ़ाना चाहता है दबदबा
ऐसे में झामुमो चाहता है कि ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ शहरी इलाकों में भी अपनी मजबूती बढ़ाएं, यह कहना यहां अप्रासांगिक नहीं होगा कि झामुमो की जन्मस्थली धनबाद रही है. और धनबाद में ही झामुमो कमजोर दिखता है. इस बार निगम चुनाव को लेकर भी कोशिश होगी कि झामुमो की मजबूती बनी रहे. वैसे, भाजपा ने भी उत्तरी छोटानागपुर के लिए भाजपा से किसी एक उम्मीदवार पर सहमति बनाने के लिए समिति का गठन किया है. लेकिन इस समिति का परिणाम क्या होगा, यह आने वाला वक्त ही बताएगा. फिलहाल टकराव की स्थिति बनती दिख रही है. आगे चलकर हो सकता है कि पार्टियां सभी उम्मीदवारों को स्वतंत्र कर दे कि आप अपने तरीके से चुनाव लड़े, वैसे भी जिस अनुपात में उम्मीदवारों की संख्या बढ़ रही है, लगता नहीं है कि पार्टियां कंट्रोल कर पाएंगी. इस बार केवल मेयर और डिप्टी मेयर पर ही राजनीतिक दलों की नजर नहीं है, बल्कि अन्य पदों के लिए भी पार्टिया उम्मीदवार पर नज़रें गड़ाई हुई हैं.
रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो
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