TNP DESK : हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व है. यह पर्व वसंत ऋतु के आगमन के साथ नई ऊर्जा, सकारात्मकता और आध्यात्मिक जागरण का संदेश लेकर आता है. साल 2026 में चैत्र नवरात्रि का आरंभ 19 मार्च से हो रहा है जो पूरे नौ दिनों तक श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा. इस दौरान श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं और उनसे सुख-समृद्धि की कामना करते हैं.
पहले दिन घटस्थापना या कलश स्थापना की जाती है
नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना या कलश स्थापना की जाती है जिसे बेहद शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है. श्रद्धालु अपने घरों और मंदिरों को सजाते हैं और अखंड ज्योति प्रज्वलित करते हैं. व्रत-उपवास रखकर लोग अपने मन और शरीर को शुद्ध करने का प्रयास करते हैं.
मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की होती है पूजा
नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है-शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री. हर दिन का अपना अलग महत्व और पूजा विधि होती है. भक्त इन नौ रूपों की आराधना कर जीवन में शक्ति, साहस और सफलता की प्राप्ति की कामना करते हैं.
भक्ति गीत, जागरण और भजन-कीर्तन का होता है आयोजन
इस पर्व के दौरान भक्ति गीत, जागरण और भजन-कीर्तन का आयोजन भी बड़े स्तर पर होता है. मंदिरों में सुबह-शाम विशेष आरती होती है और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. खासकर वैष्णो देवी मंदिर जैसे प्रसिद्ध तीर्थस्थलों पर लाखों भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं. इसके अलावा स्थानीय मंदिरों में भी धार्मिक कार्यक्रमों की धूम रहती है.
रामायण से भी जुड़ा हुआ है चैत्र नवरात्रि का संबंध
चैत्र नवरात्रि का संबंध रामायण से भी जुड़ा हुआ है. मान्यता है कि भगवान राम ने रावण पर विजय प्राप्त करने से पहले मां दुर्गा की उपासना की थी. यही कारण है कि नवरात्रि के अंत में राम नवमी का पर्व मनाया जाता है जो भगवान राम के जन्मोत्सव के रूप में प्रसिद्ध है.
व्रत रखने वाले लोग सात्विक भोजन का सेवन करते हैं
इस दौरान व्रत रखने वाले लोग सात्विक भोजन का सेवन करते हैं, जिसमें फल, दूध, साबूदाना, कुट्टू और सिंघाड़े के आटे से बने व्यंजन शामिल होते हैं. यह न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है. व्रत रखने से शरीर को डिटॉक्स करने और मानसिक शांति पाने में मदद मिलती है. समाज में भी इस पर्व का व्यापक प्रभाव देखने को मिलता है. लोग एक-दूसरे के घर जाकर शुभकामनाएं देते हैं और धार्मिक आयोजनों में भाग लेते हैं. जगह-जगह भंडारे और कन्या पूजन का आयोजन किया जाता है जिसमें छोटी कन्याओं को देवी का रूप मानकर उनकी पूजा की जाती है और उन्हें भोजन कराया जाता है.
मां दुर्गा की कृपा से हर बाधा को पार किया जा सकता है
आधुनिक समय में भी चैत्र नवरात्रि की लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई है. सोशल मीडिया पर भी लोग मां दुर्गा के भक्ति गीत, शुभकामनाएं और धार्मिक संदेश साझा करते हैं. इससे यह पर्व नई पीढ़ी के बीच भी अपनी पहचान बनाए हुए है. चैत्र नवरात्रि न केवल एक धार्मिक उत्सव है बल्कि यह आत्मशुद्धि, अनुशासन और सकारात्मकता का प्रतीक भी है. यह पर्व हमें यह सिखाता है कि जीवन में कठिनाइयों के बावजूद धैर्य और विश्वास बनाए रखना चाहिए. मां दुर्गा की कृपा से हर बाधा को पार किया जा सकता है.
अंततः, चैत्र नवरात्रि हमें नई शुरुआत, नई उम्मीद और नई ऊर्जा का संदेश देता है. यह पर्व हर व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आए यही कामना की जाती है.
Thenewspost - Jharkhand
4+


