चाईबासा: नक्सलियों ने की थी हत्या या कुछ और? सारंडा से लापता सीआरपीएफ जवान केस अब भी बना रहस्य

    चाईबासा: नक्सलियों ने की थी हत्या या कुछ और? सारंडा से लापता सीआरपीएफ जवान केस अब भी बना रहस्य

    चाईबासा (CHAIBASA): पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगलों से तीन साल पहले रहस्यमय तरीके से लापता हुए सीआरपीएफ 197 बटालियन जवान बादल मुर्मू का मामला आज भी एक अनसुलझी पहेली बना हुआ है. जिले में लगातार नक्सलियों के खिलाफ अभियान चल रहे हैं, कई बड़े माओवादी मारे जा चुके हैं और दर्जनों उग्रवादियों ने सरेंडर भी किया है, लेकिन इसके बावजूद बादल मुर्मू के बारे में कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आ सकी है. वर्ष 2023 में बादल मुर्मू अचानक लापता हो गए थे. शुरुआती दौर से ही आशंका जताई जा रही थी कि नक्सलियों ने उनका अपहरण कर लिया और बाद में उनकी हत्या कर दी. लेकिन अब तक ना तो उसका शव मिला है और ना ही कोई सुराग. बादल मुर्मू को बहादुर जवानों में गिना जाता था. वे वर्ष 2011 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे. सारंडा में नक्सली अभियान में शामिल होने से पहले वे छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ चलाए गए अभियान में शामिल थे. वहां वर्ष 2016 में नक्सलियों से हुए मुठभेड में घायल भी हुए थे. बहादुरी के लिए उन्हें सम्मानित भी किया गया था. 

    क्या नक्सलियों ने की बदल मुर्मू को हत्या?
    हाल के दिनों में आत्मसमर्पण कर चुके कुछ माओवादियों से पूछताछ में भी यह दावा सामने आया कि बादल मुर्मू की नक्सलियों ने हत्या कर दी है. पूछताछ में सरेंडर करने वाले नक्सलियों ने बताया है कि बादल मुर्मू और उनकी एक महिला साथी का अपहरण नक्सलियों द्वारा ही किया गया था.  
    फिर उनकी हत्या कर दी गई थी. लेकिन बादल का शव पुलिस अब तक बरामद नहीं कर पाई है. यही वजह है कि  आधिकारिक तौर पर उनकी मौत की पुष्टि नहीं हुई है. इसी कारण पूरा मामला आज भी एक रहस्य बना हुआ है. हाल ही में रांची में 25 नक्सलियों ने सरेंडर किया था. इन्हीं नक्सलियों ने आईबी के समक्ष पूछताछ में बादल मुर्मू की हत्या करने की बात बोली है. बताया है कि अनल दस्ते के नक्सलियों ने बादल और उसकी महिला साथी की हत्या अपहरण के तीन दिनों बाद कर दिया था. अपहरण कर उन्हें टोंटो थाना क्षेत्र के तुम्बाहाका गांव लाया गया था. 
     
    पत्नी ने सीबीआई जांच की मांग की है
    बादल मुर्मू की पत्नी झानो मुर्मू ने पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है. देश की राष्ट्रपति, गृह मंत्री और राज्य के मुख्यमंत्री को पत्र लिख जांच की मांग की है. पत्र में पत्नी ने कहा है कि घटना के तीन साल बीतने के बाद भी परिवार को इंसाफ नहीं मिला है. परिवार को सिर्फ 13 हजार रुपये की मासिक सहायता राशि मिल रही है. अगर मेरे पति देश के लिए शहीद हो चुके हैं तो उन्हें शहीद का दर्जा दिया जाए. परिवार को अनुकंपा नियुक्ति व पूरा मुआवजा मिले. परिवार का कहना है कि विभाग ने बादल को भगोड़ा घोषित कर दिया है. बादल मुर्मू के लापता मामले में सिर्फ गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई है. बादल मुर्मू 6 जनवरी 2023 को चाईबासा से सटे सिंहपोखरिया गांव के पास से लापता हो गए थे. परिवार को पहले दिन से ही नक्सलियों द्वारा उसका अपहरण करने का शक जता रहा है.

     



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