भारतीय रेल में अब नहीं चलेंगी अंग्रेजों की परंपराएं, जानिए कैसे हो रहा बदलाव 

    भारतीय रेल में अब नहीं चलेंगी अंग्रेजों की परंपराएं, जानिए कैसे हो रहा बदलाव 

    धनबाद(DHANBAD): रेलवे को अब अंग्रेजों के जमाने की व्यवस्थाएं और परंपराएं पूरी तरह से याद आ गई है. एक-एक कर उन्हें खत्म किया जा रहा है या तरीके में बदलाव किया जा रहा है. जोनल स्तर पर महाप्रबंधक के एनुअल इंस्पेक्शन पर रोक के बाद ब्रिटिश इंडिया कंपनी के समय से चल रहे रेल सप्ताह समारोह  में अवार्ड देने की प्रथा को खत्म कर दिया गया है. अब रेल मंत्री जीएम और डीआरएम के नाम से अवार्ड नहीं दिए जाएंगे. रेलवे बोर्ड ने रेल मंत्री अवार्ड  का नाम बदलकर अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार कर दिया है.

    अन्य पुरस्कारों में भी किये गए है बदलाव 
      
    इसी तरह से अन्य पुरस्कारों में भी बदलाव किये गए है. रेलवे बोर्ड के सचिव ने रेलवे के सभी महाप्रबंधक को पत्र लिखकर इसकी  जानकारी दी है. पत्र में यह भी चर्चा है कि अब किसी भी स्तर पर रेल अधिकारियों ,कर्मचारियों को नगद पुरस्कार नहीं दिए जाएंगे. जोनल मंडल स्तर पर अधिकतम एक सौ अधिकारी को ही  अति  विशिष्ट सेवा पुरस्कार मिल सकता है. आपको बता दें कि रेलवे सहित कई विभागों में अभी भी अंग्रेजों के जमाने की बनाई व्यवस्था काम कर रही है. 

     धनबाद में था अंग्रेज निर्मित डायमंड क्रॉसिंग
     
    धनबाद में तो अंग्रेजों ने देश का पहला डायमंड क्रॉसिंग बनवाया था, लेकिन अब उसे खोलकर हटा लिया गया है. यह डायमंड क्रॉसिंग देखने लायक था, कैसे ट्रेनें आती थी और अपना निर्धारित रुट  पकड़ लेती थी. वैसे भी धनबाद में अंग्रेजों के जमाने का कई चीज अभी भी जीवंत है. धनबाद के लोग काठ पुल  के नाम को नहीं भूल पाए होंगे. बाहरहाल परिवर्तन ही प्रकृति का नियम है. परिवर्तन होना भी चाहिए लेकिन सिर्फ नाम बदलने के लिए नहीं बल्कि और तरीके में भी बदलाव आने चाहिए,जिससे लोगो को लाभ मिले. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 


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