बोकारो मुठभेड़: पाकुड़ एसपी हत्याकांड का भी मास्टर माइंड प्रयाग मांझी ही था, पढ़िए कब और कहा हुई थी घटना !

    बोकारो मुठभेड़: पाकुड़ एसपी हत्याकांड का भी मास्टर माइंड प्रयाग मांझी ही था, पढ़िए कब और कहा हुई थी घटना !

    धनबाद (DHANBAD) : 2013 में पाकुड़ के एसपी रहे अमरजीत बलिहार की हत्या कर दी गई थी. यह हत्या दुमका में की गई थी. इस हत्याकांड का मुख्य रणनीतिकार प्रयाग मांझी उर्फ विवेक दा ही था, ऐसा सूत्र बताते है. दुमका -पाकुड़ मुख्य मार्ग पर काठीकुंड में घात लगाए नक्सलियों ने पाकुड़ के तत्कालीन एसपी अमरजीत बलिहार की गाड़ी को उड़ा दिया था. इस हमले में एसपी सहित पांच जवान शहीद हो गए थे. इसके अलावे भी प्रयाग मांझी कई बड़े कांडों को अंजाम देने में मुख्य भूमिका निभाई थी. सोमवार को बोकारो में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में प्रयाग मांझी सहित आठ नक्सली ढेर कर दिए गए. प्रयाग मांझी पर एक करोड़ रुपए का इनाम था. बोकारो का झुमरा इलाका नक्सलियों का गढ़ माना जाता है, लेकिन पिछले तीन महीना में सुरक्षा बलों ने ताबड़तोड़ कार्रवाई कर लगभग 10 नक्सलियों को ढेर कर दिया. इन सभी नक्सलियों पर इनाम घोषित था.  

    मारे गए नक्सलियों के पास कोई बैकअप दस्ता नहीं था 

    सोमवार को मुठभेड़ में यह बात लगभग स्पष्ट हो चुकी है कि नक्सलियों की अब कमर टूट गई है. सूत्रों के अनुसार सोमवार की सुबह जब सुरक्षा बलों ने नक्सलियों की घेराबंदी की तो उनके पास कोई बैकअप दस्ता नहीं था. अमूमन नक्सली के बड़े नेताओं के पीछे कोई ना कोई बैकअप दस्ता रहता है. नक्सलियों के साथ सोमवार को हुआ मुठभेड़ झारखंड की सबसे बड़ी मुठभेड़ थी. झारखंड का पारसनाथ और बोकारो का झुमरा नक्सलियों का गढ़ रहा है. वैसे, 2015 से नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षा बलों के अभियान से नक्सलियों की कमर टूट गई है. बोकारो में मारे गए नक्सलियों में एक बड़ा नाम अरविंद यादव उर्फ अविनाश उर्फ अनुज का बताया जाता है. पिछले दो सालों से बिहार के जमुई में नक्सली संगठन के कमजोर पड़ने के बाद सुरक्षा बलों की घेराबंटी से बचने के लिए वह झारखंड के इलाके में भ्रमणशील था. लेकिन सोमवार को हुई मुठभेड़ में वह भी मारा  गया है. 

    21 अप्रैल 2025 को एक करोड़ का इनामी नक्सली प्रयाग मांझी  मारा गया 

    बता दें कि 21 अप्रैल 2025 को एक करोड़ का इनामी नक्सली प्रयाग माझी उर्फ विवेक दा मुठभेड़ में मारा गया. इसके पहले 2024 में पुलिस अभिरक्षा में ही उसकी पत्नी जया दी की मौत हो गई थी. जया दी असाध्य रोग से पीड़ित थी. धनबाद के एक अस्पताल में वह नाम बदलकर इलाज करा रही थी. तभी इसकी सूचना गिरिडीह पुलिस को मिली. फिर मुखविरो से पुष्टि के बाद गिरिडीह पुलिस अस्पताल की घेराबंदी की और इलाज के दौरान ही उसकी गिरफ्तारी कर ली गई.16 जुलाई, 2024 को उसकी गिरफ्तारी हुई थी. धनबाद  से उसे इलाज के लिए रिम्स रांची में भर्ती कराया गया था. जहां सूचना के मुताबिक सितंबर 2024 में उसकी मौत हो गई. वह भी 25 लाख की इनामी नक्सली थी. प्रयाग मांझी धनबाद के मनियाडीह थाना क्षेत्र के दलुगोड़ा  गांव का रहने वाला था. बहुत कम उम्र में ही वह संगठन से जुड़ गया. इस वजह से उसकी पहचान भी मुश्किल थी. 

    रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो 


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