आदिवासी वोट बैंक पर भाजपा की नजर, झारखंड के 5 समेत देश की 47 लोकसभा सीटों पर है ध्यान  

    आदिवासी वोट बैंक पर भाजपा की नजर, झारखंड के 5 समेत देश की 47 लोकसभा सीटों पर है ध्यान  

    Tnp Desk:-पिछले साल जब सर्दी दस्तक देने लगी थी, तो झारखंड में सियासत की तपिश भी बढ़ने लगी थी. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भगवान बिरसा मुंडा के गांव उलिहातू में जाकर उनके पुरखों से मुलाकत की और उस मिट्टी को नमन किया, जो वीरों की भूमि है, जो उसके गौरव को याद दिलाती है. उन्होंने 15 नवंबर को बिरसा मुंडा के जन्मदिन को जनजातीय गौरव दिवस घोषित किया. वही उनके गांव उलिहातू से विकसित भारत संकल्प यात्रा की शुरुआत की.

    भगवान बिरसा मुंडा के गांव गये थे पीएम मोदी 

    आजादी के बाद देश का कोई पहला प्रधानमंत्री था, जिसने अंग्रेजों को दांत खट्टे करने वाले भगवान बिरसा मुंडा के गांव गए थे, उस बहादुर स्वतंत्रता सेनानी को याद किया, जिसने जवानी में ही आजादी के लिए कुर्बानी दे दी . लेकिन, उनकी शहादत ने आदिवासी समाज के अंदर एक नई ज्वाला पैदा की और अपने हक-हकूक के लिए खड़ा होने संदेश दे गये .लाजमी है कि प्रधानमंत्री मोदी भगवान बिरसा को याद करने के साथ-साथ उस आदिवासी समुदाय को भी भाजपा से जोड़ना चाहते थे. उनकी हसरत और कहे मकसद यही था. इस वोट बैंक को भुनाने के लिए भाजपा लगातार झारखंड में कोशिश किए हुए हैं. 

    झारखंड में पीएम मोदी की महारैली 

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आदिवासी वोट बैंक को अपने पाले में लाने के लिए फरवरी महीने में झारखंड और गुजरात में रैली करने वाले हैं. दरअसल गणति ये है कि देश में 47 लोकसभा की सीट आदिवासियों के लिए आरक्षित है. भाजपा यहां कमल खिलाने के लिए हर जुगत और ताकत झोंक दी है . मुमकिन है कि शायद पीएम मोदी 47 लोकसभा सीट पर रैली करें. अगर आदिवासियों के लिए आरक्षित 47 लोकसभा पर हुए पिछले चुनावों की बात करें, तो भाजपा ने 2014 में 27 सीट पर ही कमल खिला सकी थी. वही, 2019 में बीजेपी ने 31 सीट पर भगवा  लहराया था. इस बार उसकी कोशिश 40 से ज्यादा सीट पर विजय हासिल करने की होगी. 

    झारखंड की पांच लोकसभा सीटआरक्षित 

    झारखंड में भी पांच लोकसभा सीट आरक्षित है. जिसमे राजमहल, दुमका, सिंहभूम, खूंटी और लोहरदगा शामिल हैं. पिछले चुनाव भाजपा ने तीन में ही जीत दर्ज की थी, जबकि, सिहभूम और राजमहल सीट में हार का सामना करना पड़ा था. लोहरदगा और खूंटी में तो भाजपा ने जीत दर्ज किया था. लेकिन, वोटों का अंतर बेहद कम था. सुदर्शन भगत और अर्जुन मुंडा बेहद मुश्किल से जीत दर्ज किया था. सिहंभूम सीट ने तो भाजपा को अप्रत्यशित परिणाम दिया था यहां से कांग्रेस की गीता कोड़ा विजयी रही थी. इस बार देखा जा रहा है कि भाजपा कोल्हान औ संथाल में आदिवासी समुदाय के बीच लगातार अपनी पैठ बनाने में जुटी है. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी लगातार दौरे पर दौरा कर रहें हैं. बीजेपी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कामों को उनके सामने पेश कर रही है. इसके साथ ही ये बताने जुटी है कि कैसे केन्द्र की भाजपा सरकार उनके लिए मददगार बनीं हुई है. 
    झारखंड में लोकसभा चुनाव का रिजल्ट क्या होगा और आदिवासियों के लिए आरक्षित 47 सीट में बीजेपी कितना जीतने में कामयाब रहती है. इसके लिए अभी थोड़ा वक्त है. लेकिन, जहां तक बात जल जंगल और जमीन के प्रदेश झारखंड की है, तो संथाल और कोल्हान में भाजपा को तो एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ेगा.

    रिपोर्ट- शिवपूजन सिंह 


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