Bihar  Politics: पांचवे के लिए एनडीए को क्रॉस वोटिंग की उम्मीद तो तेजश्वी को अपने इस दावं पर भरोसा !!

    Bihar  Politics: पांचवे के लिए एनडीए को क्रॉस वोटिंग की उम्मीद तो तेजश्वी को अपने इस दावं पर भरोसा !!
    बदलाव की बयार  के बीच बिहार में राजनीतिक पारा  चरम पर है.  तरह-तरह के कयास  लगाए जा रहे हैं.  राजनीति सोच के लिए समृद्ध माने जाने वाले बिहार में फिलहाल कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं.

    धनबाद(DHANBAD): बदलाव की बयार  के बीच बिहार में राजनीतिक पारा  चरम पर है.  तरह-तरह के कयास  लगाए जा रहे हैं.  राजनीति सोच के लिए समृद्ध माने जाने वाले बिहार में फिलहाल कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं.  कई तरह के गणित बैठाये  जा रहे हैं.  मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कब इस्तीफा देंगे, कौन नया मुख्यमंत्री बनेगा? इन सब की चर्चाओं के बीच राज्यसभा के उम्मीदवारों को जिताना  एनडीए के लिए भी जरूरी है, तो अस्तित्व बचाने के लिए राजद  को भी अपने उम्मीदवार को जिताना  जरूरी है.  बिहार में राज्यसभा की  पांच सीटों के लिए 6 उम्मीदवार मैदान में हैं.  

    सीटों का गणित क्या कह रहा ,क्या है उम्मीद 

    सीटों के  गणित के अनुसार दो सीटों पर बीजेपी, दो पर जदयू और यदि पूरा विपक्ष एकजुट  रहा, तो उसके भी एक प्रत्याशी जीत सकते हैं.  जदयू की तरफ से नीतीश कुमार और रामनाथ ठाकुर उम्मीदवार बनाए गए हैं, जबकि भाजपा से नीतिन  नवीन,  शिवेश कुमार के साथ-साथ उपेंद्र कुशवाहा भी नामांकन किया है.  वहीं विपक्ष  की ओर से राजद के मौजूदा सांसद एडी  सिंह ने भी पर्चा दाखिल किया है.  ऐसे में 16 मार्च को वोटिंग होगी।  एनडीए के पास 202 विधायक हैं, यानी एनडीए चार  सीट  आसानी से जीत सकता है.  इसके बाद भी एनडीए के पास 38 वोट बच जाते हैं और पांचवी सीट के लिए उन्हें केवल तीन वोटो की जरूरत होगी।  यह बात तो तय है कि अगर एनडीए को पांचवें उम्मीदवार को विजई बनाना होगा, तो क्रॉस वोटिंग से ही मदद मिल सकती है. 

    विपक्ष के पास भी कुल 41 वोट हैं ,अब आगे क्या होगा ---?
     
    इधर, विपक्ष के पास भी कुल  41 वोट हैं.  महागठबंधन के पास 35 विधायक हैं, जबकि ओवैसी की पार्टी के पास पांच और बीएसपी के एक विधायक हैं.  अगर सभी एकजुट रहे तो राजद  के उम्मीदवार चुनाव जीत सकते हैं.  दरअसल, एनडीए को पांचवें उम्मीदवार को जिताने  के लिए तीन वोट चाहिए।  इसके लिए उनकी नजर कांग्रेस के विधायकों पर है.  इधर, तेजस्वी यादव लगातार महागठबंधन के दल ओवैसी की पार्टी और बीएसपी के नेताओं के संपर्क में हैं.  तेजस्वी यादव को भरोसा है कि उन्हें विपक्षी दलों का सहयोग मिलेगा।  सूत्र  बताते हैं कि ओवैसी की पार्टी को अपने पक्ष में करने के लिए तेजस्वी यादव ने विधान परिषद की एक सीट देने का वादा किया है.  राजद  ने बहुत होशियारी से अमरेंद्र धारी सिंह(ए डी सिंह ) को इसलिए उम्मीदवार बनाया है कि वह अपने पक्ष में समर्थन जुटाने  में सक्षम हो सकते हैं.   

    गुरुवार को एनडीए की बैठक में क्या क्या हुआ --?

    इधर, गुरुवार को एनडीए के विधायकों की बैठक गृह मंत्री सम्राट चौधरी के आवास पर बुलाई गई थी.  इस बैठक में विधायक पहुंचे, उन्हें बताया और समझाया गया, लेकिन यह बात तय नहीं हो पाई कि  कौन विधायक समूह  किस उम्मीदवार के पक्ष में वोट करेगा।  शायद चुनाव के कुछ घंटे पहले यह  सब कुछ स्पष्ट हो.  इधर, यह  भी जानकारी निकल कर आ रही है कि एनडीए की बैठक में सभी 202 विधायकों को कहा गया है कि वह 16 मार्च तक या तो पटना में रहे या उसके अगल-बगल कहीं रहे.  जिससे कि अल्प सूचना पर वह पटना पहुंच संके।  कुल मिलाकर देखा जाए तो राज्यसभा का चुनाव बिहार की बदलती राजनीति के केंद्र में आ गया है.  एनडीए अगर पांचवा उम्मीदवार नहीं जीता  सका तो उसकी किरकिरी होगी और अगर तेजस्वी यादव अपने उम्मीदवार को नहीं विजई बना सके, तो उनके भी राजनीतिक कौशल पर सवाल उठ सकते हैं. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो


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