Bihar Election: महागठबंधन के घोषणा पत्र को लेकर राजद -कांग्रेस एक तरफ तो वाम दलों की अलग क्यों है राय, पढ़िए

    Bihar Election: महागठबंधन के घोषणा पत्र को लेकर राजद -कांग्रेस एक तरफ तो वाम दलों की अलग क्यों है राय, पढ़िए

    धनबाद(DHANBAD): बिहार में चुनाव की तैयारी जोर पकड़ रही है. एनडीए हो अथवा महागठबंधन या जनसुराज  सब अपने-अपने ढंग से तैयारी में लगे हुए है.  एक -दूसरे पर हमला भी बोल रहे है.  शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बिहार पहुंचे तो सांसद प्रियंका गांधी भी बिहार के दौरे पर थी.  इधर, भाजपा चुनाव प्रभारी नियुक्त होने के बाद धर्मेंद्र प्रधान भी पटना पहुंच गए है. शनिवार से बैठकों का सिलसिला शुरू होगा.  इस बीच खबर आई है कि महागठबंधन के साझा  चुनावी घोषणा पत्र में वादों को लेकर सहयोगी दलों में मतभेद हो गया है.  राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की पार्टी  और वाम  दलों के बीच मतभेद उभर कर सामने आए है. 

     सूत्र बताते हैं कि की सीपीआई, सीपीएम और माले , यह तीनों दल संकल्प पत्र में बंदोपाध्याय समिति की रिपोर्ट लागू करने का वादा करना चाहती है.  लेकिन राजद  और कांग्रेस इससे बचना चाह रहे है.  इसके अलावा भी बनाई गई महागठबंधन की घोषणा पत्र समिति में कई मुद्दों पर विवाद की खबर है.  सबसे बड़ा विवाद  जमीन संबंधी रिपोर्ट लागू करने को है.  बंदोपाध्याय समिति की रिपोर्ट लागू करने के वादे पर घोषणा पत्र समिति में एक राय नहीं बन पाई है.  अब तेजस्वी यादव की अध्यक्षता वाली कोआर्डिनेशन कमेटी में इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा. 

    उल्लेखनीय है कि साल 2006 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार में भूमि सुधार के लिए डी बंदोपाध्याय की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन किया था. 2008 में इस समिति ने अपनी  रिपोर्ट सरकार को दी थी. इसमें बटाईदारों के लिए अलग कानून बनाने, सरकार के पास पड़ी अतिरिक्त जमीन को भूमिहीन गरीबों में बांटने, लैंड सीलिंग के जरिए एक परिवार के पास रखी जा सकने वाली भूमि की अधिकतम सीमा तय करने और कॉर्पोरेट संस्थाओं को सीधे खेती करने से रोकने जैसी सिफारिश की गई थी.  अब देखना है कि इस मुद्दे पर आगे होता है क्या----?

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 


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