झारखंड बीजेपी अध्यक्ष को लेकर बड़ी खबर, कौन-कौन से चेहरे हैं रेस में, जानिए

    झारखंड बीजेपी अध्यक्ष को लेकर बड़ी खबर, कौन-कौन से चेहरे हैं रेस में, जानिए

    रांची(RANCHI ): - झारखंड में भारतीय जनता पार्टी संक्रमण काल से गुजर रही है. पार्टी के अंदर हार के बाद निराशा का माहौल है. वैसे पार्टी के प्रमुख नेता इसे स्वीकार नहीं करते हैं. हार के बाद झारखंड में पार्टी को अलग-अलग काम में लगा दिया गया है ताकि सभी लोग व्यस्त रहें. सबसे पहले सदस्यता अभियान की शुरुआत हुई जो 22 दिसंबर 2024 से शुरू हुई. आज भी यह अभियान चल ही रहा है. तय समय तक यह काम पूरा नहीं हो पाया. सदस्य बनाने के लिए लोग बहुत उत्सुक नहीं दिख रहे अब यह भी काम हो रहा है. संगठन चुनाव की प्रक्रिया चल रही है. पदाधिकारी नियुक्त किए गए हैं. पहले कहा जा रहा था कि फरवरी में झारखंड बीजेपी को नया अध्यक्ष मिल जाएगा. परंतु अब यह संभव नहीं दिख रहा है.

    अध्यक्ष पद की दौड़ में कौन से चेहरे हैं जानिए

    झारखंड बीजेपी का खेवनहार कौन होगा यह चर्चा का विषय बना हुआ है. पार्टी के नेता और कार्यकर्ता अनुशासन के डंडे की मार से मुखर होकर कुछ कहते नहीं है परंतु अंदर खाने चर्चा हो रही है नया अध्यक्ष किस वर्ग से होगा यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है. अधिकांश लोगों का कहना है कि इस बार का अध्यक्ष ओबीसी होगा. ओबीसी वर्ग की जनसंख्या अधिक है इसलिए उसे रिझाने का प्रयास होगा.

     इस मामले में तीन नाम तेजी से चल रहे हैं. झारखंड भाजपा के नेताओं के बीच कहा जा रहा है कि इस बार का अध्यक्ष पिछड़ा वर्ग से होगा. सबसे आगे नाम चल रहा है मनीष जायसवाल का. हजारीबाग से लोकसभा सदस्य मनीष जायसवाल के पक्ष में कई कारण है. ओबीसी चेहरा,आर्थिक रूप से संपन्न, बाबूलाल मरांडी का प्रिय होना भी कारण है. मनीष जायसवाल अध्यक्ष बनने के लिए तमाम प्रयास कर रहे हैं. उन्हें कई सांसद और विधायकों का भी समर्थन मिल रहा है.

    दूसरा नाम तेजी से चल रहा है प्रदीप वर्मा का. राज्यसभा के सदस्य हैं और प्रदेश संगठन में महामंत्री भी हैं. वैसे तो बाबूलाल मरांडी के ये भी प्रिय हैं. आरएसएस में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है. राज्यसभा का भी टिकट इन्होंने कई लोगों को पछाड़कर लिया है और सांसद भी बन गए. हर तरह से अपने को मजबूत बताने का उन्होंने प्रयास किया है. पार्टी सूत्रों के अनुसार प्रदीप वर्मा फिलहाल इसी कार्य में व्यस्त हैं कि वह अध्यक्ष पद किसी तरह से प्राप्त कर लें.

    तीसरा नाम आदित्य साहू का है. 2020 में आदित्य साहू भी राज्यसभा पहुंचे. लेकिन मनीष जायसवाल और प्रदीप वर्मा की तुलना में आदित्य साहू कमजोर साबित हो रहे हैं. पार्टी सूत्रों के अनुसार आदित्य साहू तो मोदी पार्ट 3 सरकार में मंत्री भी बन सकते थे परंतु एक विषय ने उनकी संभावनाओं पर पानी ही नहीं तेजाब फेर दिया. वैसे यह भी कहा जा रहा है कि राजमहल से  विधायक रह चुके विधायक अनंत ओझा भी चाहते हैं कि उन्हें प्रदेश की कमान मिल जाए. अनंत ओझा को लगता है कि संगठन को इस प्रदेश में मजबूत करने की जरूरत है. अनंत ओझा आज नहीं बल्कि 2020 से ही संगठन की कार्यशैली से नाराज चलते रहे हैं.


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