Big Election Update: सीपी सिंह को छोड़ भाजपा के सभी विधायकों की क्यों रहेगी बल्ले-बल्ले,पढ़िए विस्तार से !

    Big Election Update: सीपी सिंह को छोड़ भाजपा के सभी विधायकों की क्यों रहेगी बल्ले-बल्ले,पढ़िए विस्तार से !

    धनबाद(DHANBAD) : भाजपा के सिटिंग विधायकों को मंगलवार की रात बड़ी राहत मिली. रांची में सीपी  सिंह को छोड़कर किसी भी विधायक की भाजपा टिकट नहीं काट रही है. ऐसा भरोसेमंद सूत्रों का दावा है. सूत्र तो यह भी बताते हैं कि मंगलवार की रात को ही पहली सूची में लड़ने वाले उम्मीदवारों को टेलीफोनिक सूचना दे दी गई है. हरियाणा में भाजपा के प्रयोग के बाद झारखंड के भाजपा विधायकों में थोड़ी परेशानी जरूर थी. उन्हें लग रहा था कि हरियाणा पैटर्न अगर झारखंड में अपनाया गया तो उनका टिकट कट सकता है. लेकिन अब इसकी संभावना पूरी तरह से खत्म हो गई है. उत्तरी छोटा नागपुर की 25 सीटें, कोल्हान की 14 सीट और संथाल परगना की 18 सीट इस बार सबके लिए महत्वपूर्ण होंगी. 

    पिछले चुनाव में भाजपा को सिर्फ 25 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा था. 2019 के चुनाव में राजद  8 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमें उसे केवल एक सीट मिली थी. कांग्रेस 31 सीटों पर चुनाव लड़ी थी, जिनमें 16 पर विजय पाई थी. झारखंड मुक्ति मोर्चा 43 सीटों पर चुनाव लड़ा था और उसे 30 सीटें  मिली थी. जबकि भाजपा लगभग सभी सीटों पर चुनाव लड़ी थी और उसे केवल 25 सीट ही मिली थी. कहा तो यही जाता है कि उत्तरी छोटानागपुर और संथाल जिस पर कृपा बरसा देंगे ,  वह पार्टी सरकार बना  सकती है.  उत्तरी छोटानागपुर में धनबाद, गिरिडीह, बोकारो, हजारीबाग, कोडरमा एवं रामगढ़ जिले आते है. इन जिलों में 25 विधानसभा की सीटें है. 2019 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 11, कांग्रेस ने चार, झारखंड मुक्ति मोर्चा ने चार, आजसू ने दो, माले, झारखंड विकास मोर्चा, राजद  व निर्दलीय ने एक-एक सीट जीती थी. बरकट्ठा से निर्दलीय जीते अमित यादव अब भाजपा में शामिल हो गए है. 

    झारखंड विकास मोर्चा का भाजपा में विलय हो गया है और बाबूलाल मरांडी फिलहाल  भाजपा के विधायक है. ऐसे में उत्तरी छोटानागपुर से भाजपा के 11 एवं आजसू  के दो विधायक है. यह बात भी सच है कि उत्तरी छोटानागपुर में जयराम महतो भी इस बार फैक्टर बनकर उभरेंगे. लोकसभा चुनाव में कई विधानसभा सीटों पर आगे रहकर उन्होंने गठबंधन के नेताओं को कुछ ना कुछ सोचने पर मजबूर कर दिया है. इसलिए देखना दिलचस्प होगा कि उत्तरी छोटानागपुर किस पर कृपा बरसाता है. 2019 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 65 पार  का नारा दिया था और पार्टी केवल  25 सीट ही जीत पाई थी. इसके बाद झारखंड में रघुवर दास की सरकार अपदस्त हो गई और हेमंत सोरेन के नेतृत्व में गठबंधन की सरकार बनी थी. भाजपा को अगर सरकार बनानी होगी तो कम से कम उत्तरी छोटानागपुर की 15 सीटों पर जीत दर्ज करनी होगी.  2019 के चुनाव के बाद कई परिवर्तन भी हुए है. इस बदलाव का असर चुनाव पर क्या पड़ता है, देखने वाली बात होगी. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो  



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