धनबाद(DHANBAD) :बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की सक्रियता चरम पर है. प्रधानमंत्री से लेकर गृह मंत्री तक लगातार दौरा कर रहे हैं, तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी अपनी पूरी ताकत झोकी हुई हैं. भवानीपुर में उन्हें घेरने की योजना से बेफिक्र ममता बनर्जी लगातार चुनावी सभा को संबोधित कर रही है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को ललकार रही हैं. बंगाल चुनाव में लगातार ट्विस्ट आ रहे हैं. 14 अप्रैल को राहुल गांधी भी बंगाल में चुनावी सभा को संबोधित करेंगे. सूचना है कि प्रियंका गांधी भी बंगाल पहुचेंगी.
अब ममता बनर्जी के लिए कितना बड़ा फैक्टर रहेंगें
इस बीच राजनीतिक पंडित आंकने में लगे हैं कि हुमायू कबीर अब ममता बनर्जी के लिए कितना बड़ा फैक्टर हैं. बता दें कि चुनाव के पहले हुमायूं कबीर की परेशानी बढ़ती जा रही है. कथित वीडियो वायरल होने के बाद ओवैसी की पार्टी ने उनसे नाता तोड़ लिया, तो शनिवार को उनके पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने भी साथ छोड़ दिया। हुमायूं कबीर अब बीच चुनाव में अकेले पड़ गए हैं. बंगाल में बाबरी मस्जिद बनाने का ऐलान कर हुमायूं कबीर सियासी चर्चा में आए थे. टीएमसी ने जब उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया, तो उन्होंने अपनी अलग पार्टी बना ली. उसके बाद ओवैसी की पार्टी के साथ मिलकर बंगाल में ममता बनर्जी की परेशानी बढ़ा दी थी.
हुमायूं कबीर बंगाल में "किंग मेकर" बनने की कोशिश में
मुस्लिम वोटो के सहारे बंगाल की राजनीति में "किंग मेकर" बनने की कोशिश कर रहे थे. हुमायूं कबीर का एक वायरल वीडियो सियासी बवाल खड़ा कर दिया है. हालांकि हुमायूं कबीर ने वीडियो को एआई वीडियो बता कर खारिज कर दिया है. लेकिन उसके बाद ओवैसी की पार्टी ने उनके साथ गठबंधन तोड़ लिया। अब सवाल किया जाने लगा है कि ओवैसी के साथ गठबंधन टूटने का बंगाल के चुनाव में किसे फायदा होगा? बताया जाता है कि पश्चिम बंगाल में 30% के करीब मुस्लिम वोटर है. मुस्लिम वोटो के सहारे बंगाल के सियासत में हुमायूं कबीर और ओवैसी बड़ा उलटफेर करने के लिए मैदान में उतरे थे. हुमायूं कबीर ने बाबरी मस्जिद बनाने की बुनियाद रखी, तो कई नेता शामिल हुए थे. विधानसभा चुनाव के लिए कबीर और ओवैसी की सियासी गठजोड़ ममता बनर्जी की टेंशन बढ़ा दी थी. हुमायूं कबीर की पार्टी ने 182 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया तो ओबैसी की पार्टी 8 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे। हुमायूं कबीर और ओवैसी ने मुसलमानों का विश्वास जीतने के लिए ममता बनर्जी और कांग्रेस को निशाने पर ले रहे थे. लेकिन अब गेम ही बदल गया है.
Thenewspost - Jharkhand
4+


