पापा को फोन कर बीडीओ ने खूब किया था टॉर्चर, गिरिडीह पंचायत सचिव की मौत पर बेटी-बहू का चौकाने वाला खुलासा

    पापा को फोन कर बीडीओ ने खूब किया था टॉर्चर, गिरिडीह पंचायत सचिव की मौत पर बेटी-बहू का चौकाने वाला खुलासा

    गिरिडीह(GIRIDIH):गिरिडीह प्रखंड की बलथरिया के पंचायत सचिव सुखलाल महतो की मौत सल्फास खाने के बाद रविवार को रांची स्थित रिम्स में इलाज के दौरान हो गई.मौत की खबर के बाद जहां उनके घर में मातम पसरा है तो वहीं मृतक पंचायत सचिव की तीनो बेटियों और नवविवाहित बहू में डुमरी बीडीओ के प्रति नाराजगी के साथ-साथ गुस्सा देखा जा रहा है. बताते चलें कि मृतक पंचायत सचिव अपने पीछे अपनी पत्नी सहित अपने तीन बेटियां और एक बेटे को छोड़ गए हैं. तीन बेटियों में शोभा देवी ललिता देवी अंजू देवी है तो वहीं पुत्र का नाम जितेंद्र कुमार है तो वही पत्नी का नाम श्यामवती देवी बताया जा रहा है.

    परिवार में अकेले कमाने वाले थे पंचायत सचिव

     इधर द न्यूज़ पोस्ट मृतक के घर में पहुंचकर उनके परिजनों से मामले की जानकारी लिया तो मृतक पंचायत सचिव के बड़ी पुत्री ललिता देवी ने बीडीओ सहित चारों व्यक्तियों को डुमरी प्रखंड कार्यालय से हटाने एवं कानूनी कार्रवाई की मांग की तथा रोजगार का भी मांग किया. बताया कि पापा ही केवल एक कमाने वाले व्यक्ति थे जो अब दुनिया में नहीं रहे.मृतक की दूसरी बेटी शोभा देवी का कहना था कि हमारे पिताजी के मौत का कारण डुमरी के बीडीओ है उन्होंने प्रशासन से डुमरी बीडीओ के खिलाफ कार्रवाई करने एवं अन्य आरोपियों पर भी कार्रवाई के साथ-साथ अपने भाई को सरकारी नौकरी देने की भी मांग की. 

    पढ़े उनकी बहू ने क्या कहा

    वहीं मृतक पंचायत सचिव की बहू सुनीता कुमारी ने कहा कि घटना के एक दिन पहले रात को फोन से भी हमारे ससुर को टॉर्चर किया गया जिसके कारण वह आहत हो गए. पूछने पर कुछ भी नहीं बताएं और शांत होकर सो गए. उन्होंने कहा कि मेरी शादी साल भर पहले ही हुई है और मेरे पति कुछ भी नहीं करते इसलिए मुआवजा के साथ-साथ मेरे पति को सरकारी नौकरी दिया जाय.बताते चले की सुखलाल महतो मूलता डुमरी प्रखंड के कुलगो उत्तरी पंचायत स्थित कंचन गली के निवासी थे. उनका स्थानांतरण पीरटांड प्रखंड से 3 माह पूर्व डुमरी प्रखंड में हुआ था इसके बाद उन्हें डुमरी के बलथरिया पंचायत सचिव का कार्य भार सौपा गया था.

    काफ़ी दबाव में रखा जा रहा था उनको

     सूत्रों की माने तो आवास योजना सहित पंचायत में चल रहे कई योजनाओं को समय पर पूरा करने का उन पर काफी दबाव था परंतु समय पर सारा योजना नहीं होने के कारण एक तरफ उनके ऊपर मानसिक तनाव था तो वहीं अधिकारियों की भी बात सुननी पड़ती थी.

    रिपोर्ट-दिनेश कुमार रजक


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