कोयला चोरी रोकने के लिए BCCL ने कंप्यूटराइज वे ब्रिज लगाना शुरू किया,जानिए कंपनी की क्या है योजना

    कोयला चोरी रोकने के लिए BCCL ने कंप्यूटराइज वे ब्रिज लगाना शुरू किया,जानिए कंपनी की क्या है योजना

    धनबाद(DHANBAD): बीसीसीएल में कंप्यूटराइज्ड वे ब्रिज लगाने का काम शुरू हो गया है. योजना है कि वे ब्रिज लगाकर कोयले की चोरी को रोका जाए .प्रथम चरण में रविवार को कंपनी के सीएमडी ने गोविंदपुर क्षेत्र में दो कंप्यूटराइज्ड कांटा घरों का उद्घाटन किया. दोनों की क्षमता 60,60 टन की बताई गई है. यह भी कहा गया है कि इससे ज्यादा वजन का डंपर बीसीसीएल में काम नहीं करते. प्रबंधन ने यह कार्रवाई कोयला चोरी की लगातार शिकायतें मिलने के बाद शुरू की है. कोलियरी के उत्पादन स्थल से साइडिंग तक कोयला ले जाने के दौरान बड़े पैमाने पर कोयला चोरी होने की लगातार सूचनाएं प्रबंधन को मिल रही थी. चोरी में लगे गिरोहों को आउटसोर्सिंग कंपनियां, पुलिस और सीआईएसएफ के संरक्षण का भी आरोप लगता रहा है. अब कंप्यूटराइज्ड कांटा  लग जाने से चोरी होने पर कोयले की ट्रांसपोर्टिंग से जुड़े लोगों पर जिम्मेवारी तय करना भी प्रबंधन के लिए आसान हो जाएगा. वैसे बीसीसीएल विजिलेंस विभाग ने भी प्रबंधन पर दबाव बनाया था. कि वे ब्रिज लगाए बिना कोयला चोरी पर अंकुश लगाना संभव नहीं दिखता. पिछले सप्ताह सतर्कता जागरूकता सप्ताह की बैठक में भी इस बात पर चर्चा हुई थी .पूरे बीसीसीएल में 50 कांटा घर लगाने की योजना है ,लेकिन पहले चरण में 22 वेब्रिज लगाए जाएंगे. बीसीसीएल के प्रोजेक्टों से कोयला उठाने के बाद रास्ते से गायब हो जाने वाले कोयले पर अंकुश लगाने के लिए बीसीसीएल ने यह कार्रवाई शुरू की है. सफलता कितनी मिलेगी, यह तो समय बताएगा लेकिन योजना के अनुसार कोलियरी से कोयले की लोडिंग के तुरंत बाद कंप्यूटराइज वेब्रिज पर कोयले का वजन किया जाएगा,और  जब साइडिंग में कोयला गिराया जाएगा, उसके पहले भी वे ब्रिज पर वजन होगा .दोनों जगहों पर अगर कोयले का वजन समान हुआ तब तो ठीक अन्यथा कार्रवाई हो सकती है. वे ब्रिज कंप्यूटराइज्ड है, इसलिए इसमें बहुत मैनुअली छेड़छाड़ करना भी संभव नहीं है. देखना है कि कंपनी तो कोयला चोरी रोकने के लिए निर्णय ले रही है, उपाय कर रही है लेकिन  चोरी  में लगे संगठित गिरोह कंपनी की योजना को कितना सफल होने देंगे, यह एक बड़ा सवाल है. कोयलांचल में कोयला चोरी कुटीर उद्योग का रूप ले लिया है और इसमें लोकल से लेकर बाहर तक के कई संगठित गिरोह सक्रिय हैं. कोयला ढुलाई के क्रम में हाईवा के हाईवा कोयला दूसरी जगहों पर गिरा दिया जाता है. कोलियरी से लोड  जो गाड़ियां चलती है, वह साइडिंग में कोयला गिराने के बजाय बाहर ही बाहर किसी दूसरी जगह  पहुंच जाती है. ऐसे कई मामले लगातार पकड़े गए हैं. इसके अलावा संगठित गिरोह द्वारा अवैध उत्खनन भी किया जाता है. इसके लिए भी कंपनी सीसीटीवी कैमरा लगाने की योजना पर काम कर रही है. रेलटेल की भी मदद लेने की बात हुई है. अब देखना है कि बीसीसीएल अपने मकसद में कितना सफल हो पाती है या हम यह कह सकते हैं कि कोयला चोरी में लगा गिरोह बीसीसीएल की योजना को कितना सफल होने देते हैं.

    रिपोर्ट: सत्यभूषण सिंह, धनबाद 


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