BCCL: लोहा तस्कर-चोर जड़ में मट्ठा डालना बंद कर दें तो इस तरह कंपनी की बढ़ सकती है कमाई !

    BCCL: लोहा तस्कर-चोर जड़ में मट्ठा डालना बंद कर दें तो इस तरह कंपनी की बढ़ सकती है कमाई !

    धनबाद(DHANBAD) : कोल इंडिया की अनुषंगी इकाई बीसीसीएल चालू वित्तीय वर्ष में 18.01 करोड़ स्क्रैप बेचकर खुश है. यह अब तक का रिकॉर्ड बताया जाता है. लेकिन अगर कोयलांचल में लोहा तस्करों पर रोक लग जाए तो बीसीसीएल की स्क्रैप से आमदनी कई गुना बढ़ सकती है. धनबाद के लोगों को याद होगा कि एक समय में कोयला निकालने वाली जगह पर बालू भरने  के लिए रोपवे सिस्टम था. रोपवे से बालू की ढुलाई  होती थी और कोलियारियों के नजदीक इसे जमा किया जाता था. जब यह सिस्टम बंद हुआ तो रोपवे चोरों का निवाला बन गया. इसके अलावे भी बीसीसीएल के पास भूमिगत खदानें थी और है. उन खदानों से कोयला उत्पादन धीरे-धीरे बंद हो गया. फिर तो चोर चानक आदि को काटकर ले जाने लगे. यह काम आज भी चल रहा है.  

    स्क्रैप बेचकर कई बड़े कारोबारी बन गए 

    कहा जा सकता है कि बीसीसीएल का  स्क्रेप बेचकर कई बड़े-बड़े कारोबारी बन गए. वित्तीय वर्ष 24-25 में स्क्रैप बेचकर मैनेजमेंट ने 18.01 करोड़ की कमाई की है. 23- 24 में 16.29 करोड़ की कमाई हुई थी. यहां बताना जरूरी है कि कोयला उत्पादक कंपनी बीसीसीएल में हर साल बड़ी मात्रा में स्क्रैप जमा होते है.  समय-समय पर इसकी नीलामी भी होती है.  लेकिन जिस रफ्तार में स्क्रैप जमा होते हैं, उस गति से नीलामी नहीं होती. नतीजा होता है कि कोलियरी क्षेत्र में स्क्रैप यूं ही पड़े मिलते है. यह कहना गलत नहीं होगा कि बीसीसीएल के क्षेत्र में लोहा और केवल तस्कर सक्रिय है. स्क्रैप की चोरी और तस्करी बड़े पैमाने पर होती है. इस चोरी और तस्करी से बीसीसीएल को आर्थिक नुकसान भी होता है.  बताया जाता है कि चालू वित्तीय वर्ष में केंद्र के आह्वान पर चल रहे  स्वच्छता अभियान के दौरान बड़े पैमाने पर स्क्रैप की बिक्री की गई है. 

    अब तो स्क्रैप के उपयोग पर भी जोर  है प्रबंधन का 
     
    बीसीसीएल अब स्क्रैप के उपयोग पर भी जोर दे रही है. अभी हाल ही में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा बनाकर एक नया संदेश दिया गया था.  कोलियरी इलाकों में केबल और स्क्रैप चोरी का हाल तो यह है कि बंद अंडरग्राउंड कोयला खदान तक में यह कोयला चोर प्रवेश कर जाते है. फिर लोहा काट लेते है. कभी-कभी तो जब सूचना मिलती है तो सुरक्षा दल पहुंचता है, लेकिन सुरक्षा दल कोलियारियों के मुहाने पर ही खड़ा रहता है और लोहा तस्कर दूसरे रास्ते से कोयला काटकर निकल जाते है. ऐसी घटनाएं अकसर होती है. कोलियरी परिसर में बड़ी-बड़ी गाड़ियां भी यूं ही खड़ी रहती है. उन गाड़ियों की भी चोरी होती है. दरअसल, बीसीसीएल अब पूरी तरह से आउटसोर्सिंग की राह पर है. ऐसे में कंपनी की संपत्ति भारी मात्रा में कोलियरी  परिसर में पड़ी हुई है. उनकी कोई उपयोगिता नहीं है और यही लोहा और उसके सामान लोहा चोरों और तस्करों के लिए चारागाह बन गए है. 

    रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो 


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