हजारीबाग सेंट्रल जेल से फरार कैदियों की तलाश के लिए SIT हुई गठित, तीनों हैं दुष्कर्म के आरोपी


हजारीबाग (HAZARIBAGH): सेंट्रल जेल से तीन कैदियों के फरार होने के मामले ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है. घटना के दो दिन बाद भी पुलिस को कोई ठोस सुराग नहीं मिला है. फरार कैदियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है. हजारीबाग के एसपी अंजनी अंजन ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच टीम यानी एसआईटी का गठन किया गया है. इस टीम में दो डीएसपी, दो इंस्पेक्टर सहित कई पुलिस अधिकारी शामिल किए गए हैं. प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आ रही है कि फरार कैदियों की योजना का नेतृत्व देवा भुइयां ने किया था.
जानकारी के अनुसार 30 दिसंबर की रात करीब 2 बजे लोकनायक जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा से तीन सजायाफ्ता कैदी फरार हो गए थे. 31 दिसंबर को बंदियों की गिनती के दौरान जेल प्रशासन को इस घटना का पता चला. जांच में सामने आया कि कैदियों ने शौचालय की खिड़की की रॉड काटी और चहारदीवारी पार कर फरार हो गए. इस संबंध में लोहसिंघना थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है.
सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पता चला है कि बैरक नंबर 6 की खिड़की नंबर 4 को काटकर रात करीब 1:36 से 2:45 बजे के बीच तीनों कैदी जेल से बाहर निकले. दर्ज एफआईआर के मुताबिक फरार कैदियों में दो पॉक्सो एक्ट और एक सामूहिक दुष्कर्म का दोषी है. देवा भुइयां कतरास थाना क्षेत्र में 2019 के सामूहिक दुष्कर्म मामले में दोषी है और इससे पहले भी वह धनबाद जेल से फरार हो चुका है. जितेंद्र रवानी को पॉक्सो एक्ट में 22 साल की सजा हुई है, जबकि राहुल रजवार को नाबालिग से जुड़े मामले में उम्रकैद की सजा मिली है.
घटना के बाद जेल प्रशासन ने लापरवाही के आरोप में दो हेड वार्डन हरेंद्र महतो और उमेश सिंह को निलंबित कर दिया है. दोनों की ड्यूटी उसी वार्ड में थी, जहां से कैदी फरार हुए. जेल सुपरिटेंडेंट सीपी सुमन ने कैदियों के भागने की पुष्टि करते हुए कहा है कि पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है.
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