रांची(RANCHI): बहुचर्चित ट्रेजरी घोटाले की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है. अपराध जाँच विभाग की विशेष जांच टीम (SIT) ने बोकारो और हजारीबाग एसपी कार्यालय से करोड़ों रुपये की कथित अवैध निकासी मामले में जांच का दायरा और तेज कर दिया है. इस हाई-प्रोफाइल मामले में डिजिटल सबूत जुटाने के लिए दोनों जिलों के एसपी कार्यालयों में इस्तेमाल किए गए कंप्यूटरों की हार्ड डिस्क जब्त कर फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) भेजी गई है.
जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट आने के बाद इस पूरे घोटाले से जुड़े कई अहम राज खुल सकते हैं. माना जा रहा है कि कंप्यूटर सिस्टम में मौजूद डिजिटल रिकॉर्ड, लॉगिन डिटेल, भुगतान से जुड़े दस्तावेज, फर्जी बिल और बैंक ट्रांजैक्शन का डेटा इस मामले की पूरी परत खोल सकता है.
SIT की शुरुआती जांच में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं. जांच के मुताबिक बोकारो एसपी कार्यालय से लगभग 10 करोड़ रुपये और हजारीबाग एसपी कार्यालय से करीब 31 करोड़ रुपये की अवैध निकासी किए जाने की बात सामने आई है. जांच अधिकारियों का मानना है कि यह कोई साधारण गड़बड़ी नहीं, बल्कि बेहद संगठित तरीके से अंजाम दिया गया आर्थिक अपराध है.
इस पूरे नेटवर्क को तकनीकी और वित्तीय स्तर पर काफी योजनाबद्ध तरीके से संचालित किया गया. जांच एजेंसियों ने बोकारो मामले में कौशल पांडेय को मुख्य साजिशकर्ता माना है, जबकि हजारीबाग में शंभू कुमार की भूमिका संदिग्ध और अहम बताई जा रही है. SIT ने दोनों आरोपियों के बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन और अन्य दस्तावेजों को अपने कब्जे में लेकर गहन जांच शुरू कर दी है.
अब जांच का फोकस इस बात पर है कि सरकारी खजाने से निकाली गई रकम आखिर किन-किन खातों में ट्रांसफर हुई और बाद में उसका इस्तेमाल कहां किया गया. इसके लिए बैंक ट्रांजैक्शन हिस्ट्री, डिजिटल पेमेंट रिकॉर्ड और संदिग्ध खातों के नेटवर्क की बारीकी से जांच की जा रही है.
जांच एजेंसियों का मानना है कि FSL रिपोर्ट इस केस में सबसे बड़ा सबूत साबित हो सकती है. संभावना जताई जा रही है कि रिपोर्ट सामने आने के बाद कई और नामों का खुलासा हो सकता है, जिनकी भूमिका अब तक पर्दे के पीछे रही है. इस घोटाले ने सरकारी कार्यालयों की वित्तीय निगरानी व्यवस्था और डिजिटल सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब सबकी नजर SIT की अगली कार्रवाई और फॉरेंसिक रिपोर्ट पर टिकी हुई है.

