सिंदरी हमला कांड में फॉर्च्यूनर विवाद ने भी आग में घी डाला, जानिए क्या है पूरा मामला 

    सिंदरी हमला कांड में फॉर्च्यूनर विवाद ने भी आग में घी डाला, जानिए क्या है पूरा मामला 

    धनबाद (DHANBAD): सिंदरी में 25 अगस्त को हुए हमलाकांड के बाद लगातार इतिहास बन रहे हैं. पहला इतिहास तो यह बना कि धनबाद में इतने लोगों के खिलाफ ज्ञात और अज्ञात प्राथमिकी पहली बार हुई.  इसके अलावा उपद्रविओ के हमले में घायल भौरा के थाना प्रभारी हिमांशु कुमार के बेहतर इलाज के लिए शनिवार को भौरा के सैकड़ों लोगों ने जुलूस निकाला और उनके बेहतर इलाज की मांग की. ऐसा भी शायद धनबाद में पहली बार हुआ है. सिंदरी में जो घटना घटी, उसके पीछे कारण तो कई गिनाए जाते हैं लेकिन असली वजह सिंदरी में 'बादशाहत' की लड़ाई है. 

    फॉर्च्यूनर विवाद ने आग में घी का काम किया 
     
    संतोष चौधरी और लक्की सिंह के बीच चल रही तनातनी में नई फॉर्च्यूनर कार विवाद ने भी आग में घी का काम किया.  सिंदरी के भूंजा  मोड़ पर फॉर्च्यूनर सवार  के साथ हुए विवाद के बाद ही लक्की  सिंह के कार्यालय पर हमला हुआ.  यह हमला दो राउंड में किया गया.  उसके अलावा 25 अगस्त को तो हद हो गई , जब पुलिस की मौजूदगी में तोड़फोड़ की गई.  पुलिस पर आरोप है कि वह तमाशबीन बनी रही. हालांकि फॉर्च्यूनर वाले भी मुकदमे की जद में है.   

    कतरास में दारोगा की उड़ा दी गई थी खोपड़ी 

    आपको यह भी बता दें कि 90 के दशक में कतरास(धनबाद ) के कार्यक्रम में दरोगा आर के वर्मा को गोली मारी गई थी. गोली उनकी खोपड़ी में लगी थी.  सिर्फ दारोगा को ही नहीं, शिव बनकर कार्यक्रम करने वाले एक व्यक्ति को भी गोली मार दी गई थी. बुजुर्ग बताते है कि लाश का भी पता नहीं चला था.  कतरास थाने के दरोगा किसी वारंटी को पकड़ने के लिए उस कार्यक्रम में गए थे. उसके बाद यह सब हुआ. गोली मारने का आरोप रघुनाथ सिंह पर लगा था.  लंबे इलाज के बाद आरके वर्मा ठीक हुए.  इधर, सिंदरी कांड में भौरा  के घायल थानेदार की हालत गंभीर बनी हुई है. उनका अभी  दुर्गापुर के मिशन अस्पताल में इलाज चल रहा है.  अभी जो उनकी स्थिति है, उसमें उन्हें एअरलिफ्ट कर किसी बड़े सेंटर में ले भी नहीं जाया जा सकता है. इलाज कर रहे  डॉक्टर इसकी अनुमति नहीं दे रहे है. वैसे ,पुलिस एसोसिएशन से लेकर दारोगा के परिजन भी लगातार बेहतर इलाज की मांग कर रहे है.  धनबाद के एसएसपी उनके   बेहतर इलाज के लिए प्रयासरत भी हैं लेकिन डॉक्टर मूवमेंट की अनुमति नहीं दे रहे है. 

    भौरा के लोगों ने शनिवार को धरना दिया, बेहतर इलाज की मांग की 

    इधर, शनिवार को भौरा के थानेदार के बेहतर इलाज के लिए भौरा के सैकड़ों लोगों ने धरना दिया और जुलूस निकला.  मौजूद लोगों का कहना था कि 25 अगस्त को सिंदरी में उपद्रवियों ने उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया. उसके बाद उन्हें  धनबाद अशर्फी अस्पताल के बाद उन्हें दुर्गापुर मिशन अस्पताल में भर्ती कराया गया है. जहां उनकी स्थिति आज भी गंभीर बनी हुई है. उन लोगों का आरोप है कि इतनी बड़ी घटना के बावजूद जिले का कोई भी बड़ा जनप्रतिनिधि चाहे वह सत्ताधारी दल का हो या विपक्ष का, भौरा थानेदार की सुध लेने की जरूरत नहीं समझ रहा है.  धरना दे रहे लोगों ने राज्य सरकार को भी घेरा. मौके पर मजदूर नेता दिलीप चक्रवर्ती, शिव कुमार  यादव, उमेश यादव, जहान खां, रवि, सोनू सिंह, बैजू, सुल्पनी, सुमित यादव, डी के दुबे, आरिफ, असित, फहीम, गोलू, अफजल, टोनी सहित सैकड़ों युवा व आम लोग मौजूद थे. 


    the newspost app
    Thenewspost - Jharkhand
    50+
    Downloads

    4+

    Rated for 4+
    Install App

    Our latest news