रांची (RANCHI): झारखंड के सबसे प्रसिद्ध और बड़े अस्पताल राजेंद्र चिकित्सा विज्ञान संस्थान (RIMS) से एक बड़ी खबर सामने आई है. रिम्स की लगभग 7 एकड़ अधिग्रहित जमीन की कथित फर्जी खरीद-बिक्री मामले में आरोपियों को बड़ा झटका लगा है. दरअसल, एसीबी कोर्ट ने आरोपी सुमित्रा बड़ाइक की अग्रिम जमानत याचिका और जेल में बंद आरोपी राजेश झा की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है. दोनों आरोपियों की याचिकाओं पर सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. बता दें, गुरुवार को कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए दोनों को राहत देने से इनकार कर दिया. यह मामला रांची में सरकारी जमीन की फर्जी तरीके से खरीद-बिक्री से जुड़ा हुआ है, जिसकी जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा की जा रही है.
आपको बता दें, इस मामले में एसीबी ने पिछले महीने बड़ी कार्रवाई करते हुए चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था. जांच एजेंसी के अनुसार, फर्जी वंशावली तैयार कर सरकारी जमीन को निजी संपत्ति दिखाया गया और बाद में उसे बेच दिया गया. गिरफ्तार आरोपियों में कार्तिक बड़ाइक, राज किशोर बड़ाईक, चेतन कुमार और राजेश कुमार झा शामिल हैं. जांच के दौरान यह भी सामने आया कि इस पूरे नेटवर्क में 16 सरकारी अधिकारी और कर्मचारी भी जांच के दायरे में हैं. बताया जा रहा है कि भू-माफियाओं ने वर्ष 1964-65 में अधिग्रहित रिम्स की जमीन को फर्जी दस्तावेजों के जरिए बिल्डरों को बेच दिया था.
इसके साथ ही एसीबी की जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि जमीन सौदे में करीब 31 लाख रुपये का लेन-देन हुआ था. मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखंड हाई कोर्ट ने भी सख्त रुख अपनाया था, जिसके बाद जांच में तेजी लाई गई. अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं. सरकारी जमीन की अवैध बिक्री और फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले फिलहाल नेटवर्क की पूरी जांच की जा रही है.

