पेट्रोल बचाने की अनोखी पहल! दुमका के DSO रोज साइकिल से पहुंचते हैं ऑफिस

    पेट्रोल बचाने की अनोखी पहल! दुमका के DSO रोज साइकिल से पहुंचते हैं ऑफिस

    TNP DESK- दुमका सहित पूरे देश में पेट्रोलियम पदार्थों की बढ़ती किल्लत और अंतरराष्ट्रीय हालात का असर अब आम जनजीवन पर भी दिखाई देने लगा है। अमेरिका-ईरान तनाव के बीच ईंधन बचत को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का असर लोगों की दिनचर्या में साफ दिख रहा है। कहीं लोग निजी वाहनों की जगह सार्वजनिक परिवहन अपना रहे हैं, तो कहीं साइकिल और घोड़े तक का सहारा लिया जा रहा है

    दुमका में अफसर की साइकिल बनी चर्चा का विषय

    इसी बीच दुमका में जिला खाद्य पदाधिकारी राज शेखर कुमार अपनी साइकिल से कार्यालय पहुंचते नजर आए। शहर की सड़कों पर साइकिल चलाते अधिकारी की तस्वीर लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई। खास बात यह है कि सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके राज शेखर कुमार वर्षों से साइकिल को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाए हुए हैं।

    यह मजबूरी नहीं, मेरी जीवनशैली है: डीसीओ

    राज शेखर कुमार कहते हैं कि साइकिल चलाना उनके लिए किसी सरकारी अपील का असर नहीं, बल्कि जीवनशैली का हिस्सा है। दफ्तर जाना हो, बाजार घूमना हो या शहर में कोई छोटा काम वह अधिकतर साइकिल का ही इस्तेमाल करते हैं। केवल जिला मुख्यालय से बाहर सरकारी कार्य पर जाने के दौरान ही सरकारी वाहन का उपयोग करते हैं।

    105 किलो वजन से फिटनेस आइकन बनने तक का सफर

    उन्होंने बताया कि करीब 50 वर्ष की उम्र में उनका वजन 105 किलोग्राम तक पहुंच गया था। हालत यह थी कि पैदल चलना भी मुश्किल हो गया था और कई बीमारियों ने घेर लिया था। इसी दौरान अखबार में छपी एक खबर ने उनकी जिंदगी बदल दी। उन्होंने रोज दौड़ने का संकल्प लिया और मौसम की परवाह किए बिना अभ्यास जारी रखा।

    दौड़ से शुरू हुआ सफर मैराथन तक पहुंचा

    छोटी दूरी की दौड़ से शुरू हुआ यह सफर धीरे धीरे कई मैराथन प्रतियोगिताओं तक पहुंच गया। वर्षों की मेहनत और अनुशासन ने उन्हें फिट और ऊर्जावान बना दिया। अब रनिंग के साथ साथ साइक्लिंग भी उनकी नियमित दिनचर्या का अहम हिस्सा है।

    स्वास्थ्य सबसे बड़ा धन है

    प्रधानमंत्री मोदी की अपील की सराहना करते हुए राज शेखर कुमार कहते हैं कि स्वास्थ्य से बड़ा कोई धन नहीं होता और इसे पैसे से खरीदा नहीं जा सकता। उनका मानना है कि स्वस्थ रहने के लिए अमीर होना जरूरी नहीं, बल्कि अपनी आदतों और दिनचर्या में सुधार लाना जरूरी है।

    राष्ट्रहित के साथ स्वहित के लिए भी जरूरी है साइक्लिंग

    उन्होंने लोगों से अपील कहा कि आज के समय में साइकिलिंग सिर्फ ईंधन बचाने का माध्यम नहीं, बल्कि बेहतर स्वास्थ्य और स्वच्छ पर्यावरण की दिशा में भी बड़ा कदम है। राष्ट्रहित के साथ साथ अपने स्वास्थ्य के लिए भी लोगों को साइकिलिंग को अपनाना चाहिए।

    रिपोर्ट पंचम झा 



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