खनिजों के अवैध परिवहन में रेलवे अधिकारियों की भूमिका की जांच के लिए सरकार ने किया SIT का गठन, छह महीने में टीम सौंपेंगी रिपोर्ट

    खनिजों के अवैध परिवहन में रेलवे अधिकारियों की भूमिका की जांच के लिए सरकार ने किया SIT का गठन, छह महीने में टीम सौंपेंगी रिपोर्ट

    रांची(RANCHI): झारखंड सरकार द्वारा राज्य में चल रहे खनिजों के अवैध परिवहन में रेलवे अधिकारियों की भूमिका की जांच के लिए सरकार द्वारा एक एसआईटी टीम का गठन कर लिया गया है. जिसमे रिटायर्ड मुख्य न्यायाधीश विनोद कुमार गुप्ता को एसआईटी का अध्यक्ष नियुक्त करने का निर्णय लिया गया है. एसआईटी को 6 महीने के अंदर सरकार को इसका रिपोर्ट देना होगा. बता दें कि सीएम हेमंत सोरेन द्वारा रेल मंत्री को काफी समय पहले एक पत्र लिखा गया था, जिसमें  रेलवे पदाधिकारियों की संलिप्तता और अन्य सभी संबंधित बिन्दुओं की जांच के लिए टीम बनाने  का आग्रह किया गया था.

    मुख्यमंत्री ने रेल मंत्री को लिखा था पत्र

    बता दें कि कुछ महीनों पहले ही सीएम हेमंत सोरेन ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर अवैध परिवहन की जांच के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित SIT की जांच में सहयोग करने के लिए एक पत्र लिखा था. इस पत्र में सीएम हेमंत ने लिखा था कि राज्य सरकार के द्वारा खनन कार्य को regulate करने और अवैध खनन की रोकथाम के लिए JIMMS प्रणाली का integration सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के VAHAN पोर्टल और पथ निर्माण विभाग के टोल टैक्स / यूजर फी उद्ग्रहण के लिए सृजित पोर्टल से किया जा चुका है, जिसके फलस्वरूप सड़क मार्ग से खनिज परिवहन की उचित निगरानी की जा रही है लेकिन, रेलवे के द्वारा अवैध खनन के परिवहन की रोकथाम के लिए किए जा रहे प्रयासों में राज्य को कोई सहयोग प्रदान नहीं किया जा रहा है. राज्य सरकार और इसके पदाधिकारियों के द्वारा रेलवे से अनेकों बार पत्राचार करने के बावजूद बिना चालान के खनिज संपदा के परिवहन के मामले प्रकाश में आ रहे हैं. यही नहीं, राज्य सरकार के अनुरोध के बावजूद रेलवे के द्वारा लौह अयस्क को छोड़कर किसी भी अन्य खनिज संपदा के लिए अपने software को JIMMS portal से integrate नहीं किया गया है. राज्य सरकार के द्वारा इस विषय को भारत सरकार के नीति आयोग, पूर्वी क्षेत्रिय परिषद और कोयला मंत्रालय की बैठकों में भी उठाया जा चुका है. आश्चर्य की बात यह है कि कोयला मंत्री से बैठक में व्यक्तिगत अनुरोध के बावजूद कोयला का परिवहन अभी भी रेलवे के द्वारा JIMMS portal से integration के बगैर किया जा रहा है. राज्य सरकार के द्वारा खनन कार्य को regulate करने और अवैध खनन की रोकथाम के लिए JIMMS प्रणाली का integration सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के VAHAN पोर्टल और पथ निर्माण विभाग के टोल टैक्स / यूजर फी उद्ग्रहण के लिए सृजित पोर्टल से किया जा चुका है, जिसके फलस्वरूप सड़क मार्ग से खनिज परिवहन की उचित निगरानी की जा रही है. लेकिन, रेलवे के द्वारा अवैध खनन के परिवहन की रोकथाम के लिए किए जा रहे प्रयासों में राज्य को कोई सहयोग प्रदान नहीं किया जा रहा है. राज्य सरकार और इसके पदाधिकारियों के द्वारा रेलवे से अनेकों बार पत्राचार करने के बावजूद बिना चालान के खनिज संपदा के परिवहन के मामले प्रकाश में आ रहे हैं. यही नहीं, राज्य सरकार के अनुरोध के बावजूद रेलवे के द्वारा लौह अयस्क को छोड़कर किसी भी अन्य खनिज संपदा के लिए अपने software को JIMMS portal से integrate नहीं किया गया है. राज्य सरकार के द्वारा इस विषय को भारत सरकार के नीति आयोग, पूर्वी क्षेत्रिय परिषद और कोयला मंत्रालय की बैठकों में भी उठाया जा चुका है. आश्चर्य की बात यह है कि मेरे द्वारा कोयला मंत्री से बैठक में व्यक्तिगत अनुरोध के बावजूद कोयला का परिवहन अभी भी रेलवे के द्वारा JIMMS portal से integration के बगैर किया जा रहा है

    1000 करोड़ के अवैध खनन का मामला

    बता दें कि राज्य में लगातार अवैध खनन के मामले सामने आ रहे थे. ईडी ने भी अपनी जांच में 1000 करोड़ के अवैध खनन मामले का खुलासा किया था. ईडी की इस जांच में सीएम हेमंत के विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा सहित कई लोगों के नाम सामने आए था. ईडी ने अपनी जांच में रेलवे के द्वारा अवैध खनन की भी बात कही थी. मगर, अभी तक ईडी ने किसी रेलवे अधिकारी से पूछताछ नहीं की है. इसी कड़ी में सीएम हेमंत ने जांच टीम बनाने का निर्णय लिया है, जो रेलवे अधिकारियों से भी पूछताछ करेगी और अवैध खनन मामले में रेलवे अधिकारियों की संलिप्तता की जांच करेगी.   

     

     रिपोर्ट: आदित्य सिंह


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