खाट पर संथाली जाति की गर्भवती मरीज और 108 एम्बुलेंस में बन रही रील,देखिये वीडियो

    खाट पर संथाली जाति की गर्भवती मरीज और 108 एम्बुलेंस में बन रही रील,देखिये वीडियो

    रांची(RANCHI):  झारखण्ड में स्वास्थ्य व्यवस्था की आज दो तस्वीर दिखाते है.पहली में बदहाली और दूसरी में इस बदहाली का मज़ाक कैसे बनता है.पहली तस्वीर गिरिडीह जिला के आदिवासी बहुल  इलाके की की जहाँ आज तक सड़क नहीं पहुंची. नतीजा हुआ की जब गर्भवती महिला को अस्पताल लेजाना पड़ा तो खाट का सहारा बचा लेकिन दूसरी तस्वीर इस आदिवासी गरीब के मुँह पर तमाचा जैसा है और भद्दा मज़ाक है.जहाँ लोगएम्बुलेंस ना मिलने की वजह से दम तोड़ रहे है तो दूसरी तरफ 108 का इस्तेमाल रील बनाने के लिए किया जा रहा है.

     

    चलिए पूरा मामला समझाते है.पहला मामला गिरिडीह जिला के देवरी प्रखंड के  जेवड़ा गांव से सामने आया है.जब जेवड़ा गांव  निवासी गणेश सोरेन की पत्नी तालको मरांडी को  सुबह तेज प्रसव पीड़ा उठ गया तो उसी समय उनके पति गणेश सोरेन को कुछ समझ ही नहीं आया.क्योकि गांव में ना रास्ता है और ना ही अस्पताल।आखिर में  पत्नी की जान बचाने के लिए पति परिजनों के साथ आनन फानन में खाट पर ही तालको मरांडी को सुला कर अस्पताल की ओर चल दिए.

    इस बीच ग्रामीणों को अस्पताल तक लाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा इस बीच गांव के ग्रामीण महिलाएं और पुरुष भी तालको मरांडी के खटिया के साथ सहयोग करने के लिए चल रहे थे. ताकि कहीं रास्ते में बच्चा पैदा ना हो जाए और जैसे बच्चे की जान खतरे में ना पड़ जाए.
    किसी तरह तिसरी स्वास्थ्य केंद्र लाया गया और तब इलाज शुरू हुआ और गर्भवती के परिजनों को जान में जान आया.

       संथाली भाषा में  सरकार पर जमकर निशाना साधा और कहा कि केवल नाम के लिए आदिवासियों के रहनुमाई वाली सरकार है. क्योंकि हम आदिवासियों के गांव में अभी तक सड़क नहीं बनी है. जिसके कारण अगर लोग बीमार भी हो जाते हैं. तब भी खाट में उठाकर अस्पताल तक मरीज को ले जाना पड़ता है.बताया कि कई ऐसी घटनाएं हुई है जहां मरीज रास्ते में ही अपना दम तोड़ दिया है.

    अब एक और तस्वीर दिखाते है यह लातेहार की है.इलाज के अभाव में एक आदिवासी की जान चली गई.शव का पोस्टमार्टम हुआ.लेकिन गरीब के पास पैसे नहीं थे  और उसे सरकारी सुविधा की गाडी नहीं मिली जिसके बाद कई किलो मीटर पैदल ही शव को लेकर परिजन निकल गए.

    और अब देखिये यह स्वास्थ्य विभाग की बेशर्मी जिसमें 108 एम्बुलेंस खड़ी है.मरीज उतरता है उसे गंभीर चोट के निशान है लेकिन यह सब रील बनाने के लिए हो रहा है.देखिये कैसे रील बनाने के लिए एम्बुलेंस का इस्तेमाल किया जा रहा है.

    अब इस तस्वीर को देख कर तो साफ़ है कि झारखण्ड को एम्बुलेंस मयस्सर नहीं हो रही है और गरीब का मज़ाक एम्बुलेंस में रील बना कर रसूखदार युवक बना रहे है.ऐसे में इस मामले में भाजपा ने भी सवाल उठाया है और इसे स्वास्थ्य व्यवस्था की धज्जी बताया है.      

     गिरिडीह से दिनेश के साथ ब्यूरो रिपोर्ट     


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