धनबाद में कोयला चोरी में आउट सोर्सिंग कंपनियों का बड़ा खेल! जानिए-कैसे चल रहा है करोड़ों का अवैध कारोबार!


धनबाद(DHANBAD): यह बात सच है कि फिलहाल बीसीसीएल के लिए आउटसोर्सिंग कंपनियां "प्राण वायु" बनी हुई है. लेकिन आउटसोर्सिंग कंपनियों की आड़ में कंपनी को कैसे चूना लगाया जाता है, यह भ्रष्टाचार का एक अलग और बड़ा मामला है. 2005 से ही बीसीसीएल में आउटसोर्सिंग कंपनियों का वर्चस्व बढ़ा , यह बात भी सच है कि आउटसोर्सिंग कंपनियों के पोखरिया उत्पादन से कंपनी मुनाफे में आई थी. लेकिन चालू वित्तीय वर्ष का आंकड़ा बहुत उत्साहबर्द्धक नहीं है. आउटसोर्सिंग कंपनियों की आड़ में कई तरह के गोरखधंधे किए जाते है. कई बार यह खुलासा हुआ है कि कोलियरी में हाईवे के प्रवेश का समय तो खाते में दर्ज होता है, लेकिन उसके बाद वह हाईवा कितनी बार निकलता है और फिर प्रवेश करता है, यह दर्ज नहीं होता और यही से शुरू हो जाता है आउटसोर्सिंग कंपनियां का बड़ा खेल. पहले तो आउटसोर्सिंग कंपनियां "मुखौटा" बनाकर उत्पादन कराती थी. लेकिन अब तो लोकल कई लोग आउटसोर्सिंग कंपनी के मालिक बन गए हैं और उसके बाद खेल खूब चलता है. बीसीसीएल के कोयले के खरीदार की कमी आउटसोर्सिंग कंपनियों की करतूत का भी प्रतिफल माना जाता है. यह अलग बात है कि अवैध खनन भी यहां के लिए बड़ी समस्या है.
अस्तित्वविहीन कंपनियों की भी सामने आई है बड़ी भूमिका
अभी राज्य कर विभाग ने जो जांच पड़ताल की, उससे ऐसा लगता है कि अस्तित्व विहीन कंपनी बनाकर बड़ी मात्रा में कोयले को दूसरे राज्यों में भेजा जाता है. स्थानीय उद्योग भी चोरी के कोयले के खरीदार हैं. कुछ दिन पहले राज्य कर विभाग ने जब जांच शुरू की, तो पता चला कि अस्तित्वविहीन कंपनी बनाकर उसके नाम पर ई वे बिल यानि परमिट निकालकर 300 करोड रुपए से अधिक की बिक्री कर दी गई है. यह अलग बात है कि इसमें कोयला, लोहा और सीमेंट भी शामिल बताया गया था. निरसा में एक कंपनी का खुलासा हुआ था. जिसमें 10 करोड रुपए से अधिक की जीएसटी चोरी की गई है. यह कंपनी भी अस्तित्व में नहीं पाई गई. मतलब साफ है कि आउटसोर्सिंग कंपनियों से बड़ी मात्रा में कोयले की चोरी हो रही है. आउटसोर्सिंग कंपनियां की बीसीसीएल में समानांतर व्यवस्था चलने के भी खुलासे हुए हैं और यही कारण है कि बीसीसीएल के पूर्व सीएमडी फिलहाल जांच के दायरे में हैं.
राज्य कर विभाग की जाँच में हुए खुलासे चौंकाने वाले
आरोप है कि उस समय निर्धारित समय अवधि विस्तार से एक आउटसोर्सिंग कंपनी को अधिक विस्तार दे दिया गया. मामला फिलहाल जांच के दायरे में है. बीसीसीएल के वर्तमान सीएमडी मनोज अग्रवाल सार्वजनिक मंच से कह रहे हैं कि कोयला चोरी धनबाद के लिए कोढ़ है और धनबाद को बचाने के लिए कोयला चोरी रोकना सबसे बड़ी जरूरत है. राज्य कर विभाग की जांच के आधार पर यह तो कहा ही जा सकता है कि करोड़ो का अवैध कारोबार चल रहा है और इस कारोबार में आउटसोर्सिंग कंपनियों की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. यह अलग बात है कि कोयल का अवैध खनन भी बड़ी समस्या है. लेकिन इतना तो तय है कि आउटसोर्सिंग कंपनियों द्वारा उत्पादित कितना कोयला बीसीसीएल को मिलता है और कितना गायब हो जाता है, इसकी अगर गहराई से जांच कर दी जाए तो बड़े खुलासे हो सकते है. कई सफेदपोश के चेहरे भी बेनकाब हो सकते हैं.
कई सफेदपोश बन बैठे है आउटसोर्स कंपनियों में अघोषित साझेदार
मजदूर संगठनों अथवा नेताओं में पहले कोलियरी पर कब्जे की लड़ाई होती थी. लेकिन अब आउटसोर्सिंग कंपनियों पर कब्जे की लड़ाई होती है. धनबाद के कई बाहुबली तो आउटसोर्सिंग कंपनियों में अघोषित साझेदार भी हैं. मतलब कागज पर वह कहीं नहीं है, लेकिन उनकी साझेदारी चलती है और यही वजह है कि जब भी कोई विवाद होता है, तो दो या तीन पक्ष सामने खड़े हो जाते हैं. कहा जा सकता है कि जिस तरह कोयले के राष्ट्रीयकरण का उद्देश्य धीरे-धीरे खत्म हो रहा है, इसी तरह आउटसोर्सिंग कंपनियां के प्रचलन से अब कंपनी को फायदा से अधिक नुकसान का खतरा बढ़ गया है.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
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