टीएनपी डेस्क (TNP DESK): राष्ट्रपति भवन में आज आयोजित होने वाले भव्य समारोह में देश की 131 प्रतिष्ठित हस्तियों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया जाएगा. कला, साहित्य, विज्ञान, खेल, समाज सेवा और सार्वजनिक जीवन जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले लोगों को यह सम्मान प्रदान किया जाएगा. इस सूची में झारखंड के लिए सबसे गर्व और भावनात्मक जुड़ाव वाली खबर झारखंड आंदोलन के महानायक और झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक शिबू सोरेन से जुड़ी है. उन्हें मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित किया जाएगा.
शिबू सोरेन ने अपने पूरे राजनीतिक और सामाजिक जीवन में आदिवासी समाज, जल-जंगल-जमीन और अलग झारखंड राज्य की लड़ाई को मजबूती से उठाया. यही कारण है कि उन्हें पूरे झारखंड में सम्मानपूर्वक ‘दिशोम गुरु’ के नाम से जाना जाता था. उन्होंने दशकों तक आदिवासी अधिकारों और क्षेत्रीय पहचान के लिए संघर्ष किया और झारखंड राज्य निर्माण आंदोलन के सबसे प्रमुख चेहरों में शामिल रहे. राजनीतिक जीवन में शिबू सोरेन ने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं. वे कई बार लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य चुने गए. इसके अलावा झारखंड के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी भी संभाली और केंद्र सरकार में मंत्री के रूप में भी अपनी भूमिका निभाई. राजनीतिक उतार-चढ़ाव और विवादों के बावजूद उनकी पहचान हमेशा जननेता और आदिवासी समाज की आवाज के रूप में बनी रही.
झारखंड राज्य के गठन में उनकी भूमिका को ऐतिहासिक माना जाता है. उन्होंने गांव-गांव जाकर लोगों को संगठित किया और अलग राज्य की मांग को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया. उनके संघर्ष और योगदान को देखते हुए अब केंद्र सरकार द्वारा उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया जाना झारखंड आंदोलन को राष्ट्रीय सम्मान मिलने के रूप में देखा जा रहा है. झारखंड के लोगों के लिए यह सिर्फ एक पुरस्कार नहीं, बल्कि दशकों के संघर्ष, आंदोलन और आदिवासी अस्मिता की पहचान का सम्मान है. शिबू सोरेन के समर्थकों और झारखंड आंदोलन से जुड़े लोगों में इस फैसले को लेकर भावनात्मक माहौल है. लोग मानते हैं कि ‘दिशोम गुरु’ को मिला यह सम्मान आने वाली पीढ़ियों को भी संघर्ष और सामाजिक अधिकारों की लड़ाई के लिए प्रेरित करेगा.

