हाथियों के झुंड ने लोहरदगा-लातेहार जिले के सीमाने पर जम कर मचाया उत्पात, एक बछड़े को कुचला, हज़ारों फसल बर्बाद


लोहरदग़ा (LOHARDAGA): लातेहार जिले के सिमाना चंदवा थाना क्षेत्र के बरवाटोली और कुडू के राजरोम में रविवार की रात हाथियों के झुण्ड ने जमकर तांडव मचाया. इस दौरान सनकी हाथियों के इस झुंड ने बरवाटोली के उढरा टोली में एक गाय के बछड़े को कुचल कर मार डाला और मोसेमात दहली देवी पति स्व शिकवा भगत के घर को धाराशाई कर दिया. रात के करीब 11 बजे हुए हाथियों के हमले से घर मे मौजूद उनकी बेटी मंगरी देवी ने अपनी बेटी के साथ घर से भागकर अपनी जान बचाई. वहीं दूसरे हिस्से में सो रही उसकी दहली देवी बाल बाल बच गयी. इस दौरान हाथियों ने घर मे रखे बर्तन को पैरों से रौंदा और सारे अनाज चट कर गए. फिर जगदीश रजवार, पिता रंथू रजवार, ललित उरांव, लालू उरांव के खेतों में लगी फसलों को रौंद वापस जंगल में चलते बने. ग्रामीणों ने बताया कि बड़े छोटे करीब 23 हाथियों का यह झुंड फिलहाल सोन पतरा ( जंगल ) में शरण लिए हुए है. जिससे आसपास के ग्रामीण दहशत में हैं. लोगों को इस बात की चिंता सता रही है कि आज रात हाथियों का झुण्ड किसकी तबाही का कारण बनेगा ? अगला निशाना कौन होगा ? क्योंकि बीते कई वर्षों से हाथियों के झुण्ड एक के बाद एक गांव में हमला कर घरों और फसलों को नुकसान पहुंचाते रहे हैं. इधर घटना की सूचना पर पंचायत की मुखिया शकुंतला देवी ने पीड़ित परिवार से मुलाक़ात की और डीएफओ से बात कर पीड़ित को तत्काल सहायता पहुंचाने की बात की है.
ग्रामीणों को थी हाथियों के आने की सूचना
ग्रामीणों को हाथियों की आने सूचना सुबह ही मिली थी. ग्रामीणों के अनुसार यह झुंड शनिवार 15 अक्टूबर को खलारी थाना क्षेत्र दुल्ली बसरिया क्षेत्र में था. और तेज़ गति से हाथियों का यह दल लगातार आबादी की तरफ आ रहा था. ग्रामीणों ने रविवार की सुबह 6 बजे जमुवारी गांव के टइय्याबर टोले से गुज़रते हुए देखा था. साथ ही बरवाटोली जंगल पहुंच आराम करने की भी सूचना थी. इसको लेकर चंदवा ब्लॉक के हरगाढा, जावाखांड़, बेलगा, टाटा, हेसालौंग और कुडू ब्लॉक के कालीपुर, राजरोम, हेंजला सहित आस पास के ग्रामीणों और खासकर किसान इस बात को लेकर भयकरान्त थे हाथी कभी भी हमला कर सकते हैं. और हुआ भी वही ग्रामीण जिससे डरते थे वही बात हो गयी. ग्रामीणों के अनुसार सूचना के बावजूद भी वन विभाग ने क्षेत्र में किसी प्रकार की गश्त नहीं शुरू की, जिसके फलस्वरूप हाथियों ने अपना कार्यक्रम शुरू कर दिया.
रिपोर्ट: लोहरदगा ब्यूरो
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