गुरूजी के स्मारक के नाम पर उजाड़ी जा रही 50 साल पुरानी बस्ती, क्या दिशोम गुरु होते तो आज ऐसा होने देते

    गुरूजी के स्मारक के नाम पर उजाड़ी जा रही 50 साल पुरानी बस्ती, क्या दिशोम गुरु होते तो आज ऐसा होने देते

    रांची(RANCHI): HEC की जमीन पर बसे लोगों को लम्बे समय के बाद उजाड़ा जा रहा है. बस्ती विरान हो गई. सर से कई गरीबों  के छत चली  गई. अब आसमान छत और जमीन गरीबों का बिस्तर हो गया. तस्वीर देख कर समझ जाएंगे की घर टूटने के बाद दर्द कितना होता है. घर झोपडी का हो या महल घर हर किसी का घर होता है.लेकिन 50 साल से झोपडी बना कर रह रहे लोगों को अचानक उजाड़ दिया गया.

    रांची के बिरसा चौक पर अतिक्रम मुक्ति अभियान चला और फिर पूरी  बस्ती जमीन दोज हो गई. जिसके बाद गरीब सड़क पर उतर कर जिला प्रशासन और सरकार के खिलाफ खूब गुस्से में दिख रहे है.प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने पूछा की इस जमीन पर गुरूजी की मूर्ति बनाने की बात आई है. तो क्या गुरूजी ज़िंदा होते तो वह गरीबो को उजाड़ कर अपनी मूर्ति लगवाते. 

     बताया जा रहा है कि शिबू सोरेन के स्मृति में HEC  की जमीन पर पार्क बनेगा जिसमें 50 फ़ीट की उनकी मूर्ति होगी.इसका निर्माण हरमू बाई पास रोड में होना है.हलाकि इसकी कोई आधिकारिक जानकारी अब तक सामने नहीं आई है.लेकिन जब jcb के साथ अतिक्रम हटाने टीम पहुंची तो खूब हंगामा हुआ और सड़क पर उतर कर बस्ती के लोग प्रदर्शन करने लगे.

    प्रदर्शन करने वालो की मांग है कि कई दशक से सभी यहाँ रह रहे थे.लेकिन अचनाक सब खत्म हो गया.कुछ नहीं बचा है,अब कहा जाये यह समझ में नहीं आरहा है.फूलन देवी ने बताया कि घर में कोई नहीं है.उनकी उम्र भी 65 साल से उपर हो गई पति ठेला पर चना बादाम बेच कर गुजारा करते थे लेकिन अब घर टूट गया कोई सहारा नहीं बचा है.वहीं  घर के मलबे पर बैठ कर सोनमती यह सोच रही है कि अब क्या होगा कौन सुनेगा।घर था वह भी खत्म हो गया.

    घर मलबे में तब्दील होने के बाद कुछ लोग सड़क पर उतरे और दिल्ली के तर्ज पर स्थाई करने की मांग करने लगे.सभी ने एक सुर में कहा कि घर टूट गया. अब कहाँ जायेंगे. लोग गुस्से में थे सरकार से काफी नजर है. पहले खूब नारेबाजी की गई फिर जब द न्यूज़ पोस्ट की टीम बात करने पहुंची तो उन्होंने पूछा की गुरूजी की मूर्ति क्या कही और  सकती है. आखिर किसी को उजाड़ कर गुरूजी को कैसा सम्मान दिया जा रहा है.

    अब यह दर्द और पीड़ा वही लोग समझ सकते है जिनके सर से छत चली गई. और दूसरा कोई विकल्प बचा हो. ये लोग अवैध तरीके से जरूर रह रहे थे लेकिन सभी के पास वैध पते का पहचान पत्र, आधार कार्ड राशन कार्ड सरकार ने ही दिया फिर बिजली कनेक्शन मिला और नगर निगम ने पानी का भी सप्लाई दिया जिसका पैसा हर माह जमा कर रहे थे. अब जरुरत है कि सभी को किसी दूसरे जगह पर शिफ्ट कर दिया क्योकि सरकार ही तो जनता की माई बाप होती है.     


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