यहां जान हथेली पर रखकर जाते हैं स्कूल, हॉस्पिटल और दफ्तर, घंटों में तय होता चंद मिनटों का सफर

    यहां जान हथेली पर रखकर जाते हैं स्कूल, हॉस्पिटल और दफ्तर, घंटों में तय होता चंद मिनटों का सफर

    लोहरदगा (LOHARDAGA ) झारखंड अपना 22वां स्थापना दिवस मनाने की तैयारी में है. लेकिन इन बाइस वर्षोंं में राज्य का विकास कितना हो पाया है, इसका उदाहरण लोहरदगा जिले के कैरो प्रखंड क्षेत्र में दिखता है. विकास के नाम पर आज भी गांव के लोगों को बांस के सहारे नदी को पार करना पड़ता है. लोहरदगा जिला मुख्यालय से कैरो प्रखंड को जोड़ने वाली यह सड़क बंडा नदी पहुंच कर टूट जाती है. वर्ष के छह माह इस नदी में पानी रहता है. इस नदी के दूसरी ओर बच्चों के स्कूल, स्वास्थ्य केन्द्र और कैरो प्रखंड मुख्यालय हैं. लेकिन चंद मिनटों की इस दूरी को पूरा करने में नदी के एक छोर के लोगों को घंटों लग जाते हैं. जब इस नदी में पानी का स्तर कम होता है, तो गांव के लोगों को रोजगार मिल जाता है.  बांस के सहारे स्कूली बच्चे, ग्रामीण और बाइक को पार कराने का काम इन्हें मिल जाता है. इस एवज में प्रति व्यक्ति दस रुपए और वाहन के अलग से दस रुपए लिए जाते हैं. सुबह से शाम तक यह काम चलता रहता है क्योंकि कैरो का प्रखंड मुख्यालय और बाजार इस नदी के दूसरे छोर की ओर स्थित है.

     पुलिया की फाइल सरकार के पास पेंडिंग 

    प्रतिदिन इस रास्ते से तीन से चार सौ लोगों का आवागमन होता है. लेकिन इस नदी पर पुल निर्माण कार्य आज तक पूरा नहीं हो पाया. स्कूली बच्चे पढ़ाई से वंचित हो जाते हैं. वहीं बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचने में घंटो वक्त लग जाता है. साथ ही ऑफिस, बाजार और राशन लाने ले जाने वाले लोग जान हथेली पर रखकर पार होने का काम करते हैं. लेकिन इस ओर झारखंड सरकार का ध्यान कब आएगा यह सवाल ग्रामीण आज भी पूछते हैं. लोहरदगा जिला मुख्यालय को कैरो प्रखंड मुख्यालय से जोड़ने वाली इस पुलिया की फाइल सरकार के पास पेंडिंग है. ग्रामीण विकास विभाग विशेष प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता का यह कहना है. सरकार के द्वारा जैसे ही इस फाइल पर अपनी सहमति देने का कार्य करेंगे वर्षो की उम्मीद धरातल पर उतरने लगेगी. लेकिन वह दिन कब आएगा, यह बता पाने में कार्यपालक अभियंता भी असमर्थ हैं. लोहरदगा विधानसभा के विधायक डॉ रामेश्वर उरांव झारखंड सरकार में वित्त मंत्री की भूमिका में हैं. ऐसे में जिलेवासियों की उम्मीद और बढ़ जाती है. ऐसे में देखना है कि जिले की जनता की उम्मीद पर मंत्री कितना खरा उतरते हैं. लेकिन यह कहा जा सकता है कि वर्षोंं पुरानी उम्मीद इन राहगिरों की इसी नदी की जलधारा में बहती चली जा रही है. लेकिन वक्त कब इन्हें इस परेशानी से दूर कर पाएगा यह जवाब किसी के पास नहीं हैं.


    रिपोर्ट : गौतम लेनिन (लोहरदगा )


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