आंखों में आंसू और मांग में सिंदूर लिए मां की विदाई

    आंखों में आंसू और मांग में सिंदूर लिए मां की विदाई

    दुमका(DUMKA)-शारदीय नवरात्र के बाद विजयादशमी का त्यौहार आता है. बता दें कि विजयदशमी के दिन दुमका के दुर्गा मंदिर में सिंदूर खेला का आयोजन होता है. इस दिन मां दुर्गा की विदाई का समय होता है. आंखों में आंसू लिए सब मां को विदा करते हैं, लेकिन ऐसा करने से पहले सुहागिन महिलाएं मां को सिंदूर लगाकर मंगलकामना करती हैं. साथ ही मां को भोग लगाकर उनका आर्शीवाद लिया जाता है. हर सुहागन यही मनोकामना करती है कि उसके सुहाग पर आने वाला हर संकट मां टाल दे. हर तरफ उड़ता सिंदूर माहौल को और भक्तिमय बना देता है. वहीं, महिलाओं ने सालों से चली आ रही मां की विदाई से पहले उन्हें सिंदूर लगाने की परंपरा निभाई जाती है.

    कोरोना से मुक्ति की कामना

    इस दिन एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर मस्ती भी करती हैं. मान्यता है कि दुर्गा मां अपने परिवार के संग मायके आई हैं और ससुराल जाते समय दशमी के दिन उनकी मांग भरी जाती है. बंगाली समाज में सिंदूर खेला की परंपरा सालों से चली आ रही है. हर सुहागन यहीं मनोकामना करती है कि उसके सुहाग पर आने वाला हर संकट मां दुर्गा टाल दें. एक तरफ मां की विदाई तो दूसरी तरफ सुहागिने मन में उमंग और सौभाग्य की कामना लिए सिंदूर खेला खेलती हैं. इस वर्ष कोरोना संक्रमण को लेकर सरकार द्वारा कई गाइडलाइन दिए गए हैं जिसका पालन करते हुए महिलाएं अपनी परम्परा और संस्कृति को लेकर सदा सुहागन की कामना लिए मां दुर्गा की विदाई में शामिल हुईं और मां दुर्गा से संसार को कोरोना से मुक्ति देने की प्राथना की.

     रिपोर्ट :  पंचम झा, दुमका

     


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