साढ़े तीन महीने जेल में रहने के बाद आजसू के केंद्रीय सचिव हरेलाल महतो बेल पर बाहर, गाजे-बाजे के साथ स्वागत

    साढ़े तीन महीने जेल में रहने के बाद आजसू के केंद्रीय सचिव हरेलाल महतो बेल पर बाहर, गाजे-बाजे  के साथ स्वागत

    सरायकेला (SARAIKELA)-आजसू के केंद्रीय सचिव हरेलाल महतो करीब साढ़े 3 महीने जेल में रहने के बाद हाई कोर्ट से बेल मिलने के बाद बाहर निकले. बता दें कि उन पर सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने, कोरोना गाइडलाइन का पालन करवाने गई पुलिस पार्टी पर भीड़ को उकसा कर हमला करवाने जैसे कई आरोप हैं. जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में जेल कस्टडी में इलाजरत आजसू नेता हरेलाल महतो हाईकोर्ट से बेल मिलने के बाद सारी प्रक्रियाओं को पूरा कर बाहर आए. इस दौरान पूर्व मंत्री रामचंद्र सहित समेत कई नेता और काफी संख्या में कार्यकर्ताओं ने उनके बाहर आने पर माला पहनाकर स्वागत किया. साथ ही पूरे गाजे-बाजे और गाड़ियों के काफिले के साथ जुलूस के शक्ल में वे अपने कर्म क्षेत्र सरायकेला के ईचागढ़ विधान सभा पहुंचे. इस दौरान विभिन्न चौक चौराहों पर उनके समर्थकों द्वारा उनका जोरदार स्वागत किया जा रहा है. साथ ही वे जुलूस के शक्ल में जा जाकर सभी शहीदों के प्रतिमाओं को माल्यार्पण कर अपने बाहर आने की खुशी मना रहें हैं. जमानत पर बाहर आकर खुशी से फूले न समाए आजसू नेता हरेलाल महतो ने इस दौरान मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें राजनीति शिकार बनाया गया था.  आज सत्य की जीत हुई है. वहीं पूर्व मंत्री रामचंद्र सहिस ने कहा हमारे नेता की रिहाई जनता की जीत है.  

    सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न करने के आरोप

    मालूम हो कि बीते 23 अप्रैल को नीमडीह थाना अंतर्गत बामणी गांव में चरक पूजा का आयोजन किया गया था. उस समय कोरोना संक्रमण काफी पीक पर था और सरकारी निर्देशों के अनुरूप किसी प्रकार के पूजा कार्यक्रम या जमावड़ा पूरी तरह से प्रतिबंधित था. बावजूद इसके इस चरक पूजा में सैकड़ों लोगों की जुटान हुई था. इसी की खबर पाकर नीमडीह पुलिस बामणी गांव पहुंची और चरक पूजा को बंद कराने का प्रयास कर रहीं थी. इसी बीच अचानक भीड़ ने पुलिस पार्टी पर हमला कर दिया. जिससे कई पुलिसकर्मी बुरी तरह से घायल हो गए. इस घटना में आजसू नेता हरेलाल महतो द्वारा कार्यक्रम आयोजन को लेकर फंडिंग की बातें सामने आई थी. साथ ही कार्यक्रम पर रोक लगाने गए पुलिस पर हमला करने के लिए भीड़ को उकसाने, कोरोना गाइडलाइन का उल्लंघन करने, सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने जैसे कई आरोप लगे. जिसके बाद उनके खिलाफ वारंट जारी किया गया. हालांकि वे इस घटना के बाद कई महीने तक पुलिस के गिरफ्त से बाहर रहे और लुकाछिपी का खेल जारी रहा. जिसके बाद बीते 23 जुलाई को उन्हें बंगाल से गिरफ्तार किया गया था. जिसके बाद उन्हें जेल भेजा गया. जहां से स्वास्थ्य खराब होने का हवाला देते हुए उन्हें जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में जेल कस्टडी में इलाज चल रहा था.

    रिपोर्ट:  विकास कुमार, सरायकेला

     


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