शहीद गणेश हांसदा की जयंती आज : 20 लाख खर्च करके परिवार ने बनाया स्मारक उद्यान, बिजली तक को तरसा रही सरकार

    शहीद गणेश हांसदा की जयंती आज :   20 लाख खर्च करके परिवार ने बनाया स्मारक उद्यान,  बिजली तक को तरसा रही सरकार

    जमशेदपुर (JAMSHEDPUR) : आज शहीद गणेश हांसदा की जयंती है. बहरागोड़ा के कोसाफलिया गांव का ये लाल वर्ष 2020 में चीन-भारत सीमा पर शहीद हो गया था. घरवालों का दिल देखिए, सेना से मिले पैसों में से ही उनलोगों ने बेटे की याद में स्मारक बना दिया. झारखंड सरकार या स्थानीय प्रशासन ने नहीं, बल्कि खुद घरवालों ने उस पैसे से बनाया जिसका व्यक्तिगत खर्च करना उनका हक था. चार महीना पहले ही प्रथम पुण्यतिथि पर स्थानीय झामुमो विधायक समीर मोहंती ने स्मारक में बिजली कनेक्शन दिलाने का वायदा किया था जो अब चार महीना बीतने के बाद भी पूरा नहीं हुआ. मंगलवार को जयंती के अवसर पर पूर्व विधायक  सह भाजपा नेता कुणाल षाड़ंगी गांव पहुंचे और विधायक समीर मोहंती के वायदे पर सवाल खड़ा करते हुए चेतावनी दी कि जल्द बिजली कनेक्शन दिया जाए नहीं तो तेज़ आदोलन होगा. कुणाल षाड़ंगी ने मुख्यमंत्री से गुजारिश की है कि वे इस मामले में खुद संज्ञान लें.

    चार महीनों से स्मारक उद्यान बनकर तैयार


    शहीद गणेश हांसदा के भाई दिनेश हांसदा ने 20 लाख की लागत से शहीद गणेश हांसदा की स्मृति में स्मारक उद्यान बनवाया है. बार बार गुहार लगाने के बावजूद बिजली विभाग ने कनेक्शन नहीं दिया है.16 जून 2021 को शहीद की पहली पुण्यतिथि पर शहीद के परिजनों ने बहरागोड़ा के झामुमो विधायक समीर मोहंती से गुहार लगाई थी कि बिजली का कनेक्शन दे दिया जाए ताकि दूर दराज से लोग आएं और शहीद गणेश हांसदा की याद में बने इस पार्क का भ्रमण कर देशभक्ति की प्रेरणा लें. उस दिन विधायक ने आश्वासन दिया था कि छह दिनों के भीतर बिजली की व्यवस्था हो जाएगी, लेकिन आज चार महीने बीत गए वादा पूरा नहीं हुआ. शहीद के भाई दिनेश हांसदा कहते हैं कि या तो विधायक ठोस पहल नहीं कर रहे या बिजली विभाग उनकी नहीं सुन रहा है.  बकौल दिनेश हांसदा,  एक आश्वासन बिजली विभाग के कार्यपालक अभियंता की तरफ से भी मिला था, जिसके पूरा होने का आज तक इंतज़ार है.

    सरकारी उदासीनता से दुखी परिजन

    शहीद के परिजनों औऱ स्थानीय लोगों को इस बात का दुख है कि सरकार इस उद्यान को लेकर उदासीन है. उनका कहना है कि  प्रशासन को खुद शहीद की याद में  स्मारक बनाने की पहल करनी चाहिए थी. लेकिन ऐसा नहीं किया गया. यहां तक कि भाई द्वारा बनाए गए इस स्मारक को सुविधाएं देने में भी उदासीनता बरती जा रही है, जो दुखद है. 

     


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