आरएसएस के चिंतन शिविर में पांच राज्यों में होने वाले चुनाव पर मंथन जारी, जाति के आधार पर अपना पराया नहीं मनाता संघ : राकेश लाल

    आरएसएस के चिंतन शिविर में पांच राज्यों में होने वाले चुनाव पर मंथन जारी, जाति के आधार पर अपना पराया नहीं मनाता संघ : राकेश लाल

    धनबाद ( DHANBAD) - राष्ट्रीय स्वयं संघ की धनबाद में चल रहे तीन दिवसीय चिंतन शिविर पर भाजपा के शीर्ष नेताओं की ही नजर नहीं है बल्कि पूरे देश की निगाहें है. ,सबकी नजरें संघ प्रमुख सन्देश पर लगी है. अभी कुल पांच राज्यों में चुनाव होने वाले है. झारखंड व बंगाल चुनाव में करारी हार को न भाजपा भुला पाई है और न भुला पाएगी.  संघ को भी झारखंड -बंगाल में हार पच नहीं रहा है, पांच राज्यों में यूपी सबसे महत्वपूर्ण राज्य भाजपा के लिए है.  यहाँ के सीएम को भी उत्तराखंड , गुजरात और कर्नाटक की तरह बदलने की कोशिश हुई लेकिन केंद्रीय नेतृत्व को इसमें सफलता नहीं मिली. निश्चित रूप से योगी को सीएम बनाए रखने में संघ की कही न कही प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष भूमिका की बात कही जाती है | यह देखा गया कि संघ के हस्तक्षेप पर ही योगी को भी थोड़ा पीछे हटना पड़ा ,नाराज नेताओ को भी हाथ मिलाना पड़ा और केंद्रीय नेतृत्व को भी "समझौतावादी" बनाना पड़ा. अब यूपी का चुनाव केवल भाजपा के लिए ही नहीं बल्कि संघ के लिए भी महत्वपूर्ण हो गया है. इसी बीच,धनबाद में चिंतन शिविर का आयोजन हो गया ,वैसे आधिकारिक रूप से कहा तो यह जा रहा है कि संघ प्रमुख पूरे देश के दौरे पर हैं. लेकिन यूपी के चुनाव के लिए हिंदी पट्टी को साधने के लिए शायद झारखंड को चुना गया.  धनबाद को झारखण्ड का बिहार कहा जाता है. यहाँ बिहारियों व पूर्वी यूपी के लोगो की संख्या अधिक है.  झारखण्ड में रहते हुए भी यहाँ के हिंदी भाषी लोग बिहार और यूपी के चुनाव को प्रभावित करने की ताकत रखते है. शायद यही कारण है कि चिंतन शिविर के लिए धनबाद का चयन किया गया.

    जाति के आधार पर अपना पराया नहीं मनाता संघ : राकेश लाल 

     सह प्रांतीय कार्यवाहक राकेश लाल जी मीडिया सवालों का जवाब देते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ किसी जाति के नाम पर किसी को अपना अथवा पराया नहीं मानता. संघ में सभी अपने हैं. किसी को पता ही नहीं चलता कि उसके साथ कबड्डी खेलने वाला शख्स किस जाति का है. झारखंड विधानसभा में नमाज के लिए कमरा  आवंटन के मामले पर भी संघ की  तरफ से कोई ऐसी प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की गई ,जो आने वाले वक्त में विवाद का कारण बने इतना जरूर कहा गया  कि  गठित की गई कमेटी के अंत में जो निर्णय आएगा, उसके बाद देखा जाएगा. वहीं ,संघ की तुलना कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह  द्वारा तालिबान से किए जाने को लेकर उन्होंने कहा कि समुद्र की तुलना समुद्र से की जा सकती है, आसमान की तुलना आसमान से, संघ की तुलना किसी दूसरे संगठन से नहीं की जा सकती.
    धर्मांतरण के मुद्दे पर पूछे गए सवाल पर  कहा कि संघ किसी को कहीं जाने से रोकता नही,किसी को आने को कहता नही. संघ हिंदुओं का संगठन है.हिन्दू शक्ति कैसे इस देश में ठीक रहे,हिन्दू कैसे इस देश के लिए खड़ा रहे ,
     

    सुख- सुविधा  भोगी नेताओ पर चल सकती है कैंची

    इधर, मंथन के बाहर छन कर आ रही खबरों के अनुसार  मंथन शिविर में झारखण्ड में भाजपा की हार  तो चर्चा के केंद्र में है ही,संगठन को और जुझारू और धारदार बनाने पर भी मंथन हो रहा है. स्वंय सेवक टोले मुहल्लों में जाय,शाखा लगाए ,सुदूर गावो में राते गुजारे ,वहां  की समस्याए जाने आदि जमीनी कार्यक्रमों को भी शामिल किया गया है. मतलब साफ है कि अब यहाँ के भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को यह सब करना होगा. भाजपा नेताओ को अब एसी गाडियों से उत्तरकर  बाइक की भी सवारी करनी पड़ेगी. धर्म परिवर्तन को भी संघ आपने एजेंडे में शामिल किया है. संगठन को और मजबूत करने की भी कोशिश होगी. इधर,कार्यक्रम में भाग लेने धनबाद पहुंचे बिहार -झारखण्ड के संगठन मंत्री नागेंद्र त्रिपाठी से धनबाद के सभी दिग्गज नेता मिलने पहुंचे. 

     

     


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